लखनऊ. उत्तर प्रदेश के देवबंद में जमीयत उलमा-ए-हिंद ने लखनऊ से गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों का केस लड़ने का एलान किया है। जमीयत उलेमा क़ानूनी इमदाद कमेटी के अध्यक्ष गुलज़ार आज़मी ने बुधवार को बताया कि उतर प्रदेश आतंकवाद रोधी दस्ता (एटीएस) द्वारा आतंकवाद के आरोप में गिरफ़्तार दो मुस्लिम युवकों के परिवार के लोगों ने जमीयत उलेमा-ए-हिन्द से क़ानूनी सहायता मांगी है।

उन्होंने बताया कि अनुरोध प्राप्त होने के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के आदेश पर आरोपियों को क़ानूनी सहायता दी जाएगी। मदनी ने कहा कि जमीयत के प्रयासों से अब तक सैकड़ों युवक आतंकवाद के मुकदमों में रिहा हो चुके हैं जो यह प्रमाणित करता है कि जांच एजेंसियां बग़ैर सुबूत के धार्मिक पक्षपात के आधार पर गिरफ़्तार कर लेती हैं और एक लम्बे समय के बाद अदालतें उन्हें सम्मानजनक बरी कर देती हैं।

जमीयत अध्यक्ष ने कहा कि मगर सवाल यह है कि जांच एजेंसियों के इस पक्षपातपूर्ण रवैये से मुस्लिम युवकों के जो वर्ष बर्बाद हो जाते हैं उन्हें कौन लौटाएगा इसीलिये जमीयत ने फास्ट ट्रैक अदालत की मांग की थी ताकि फैसला जल्द हो। अगर वास्तव में दोषी हैं तो सज़ा मिले, अगर निर्दोष हैं तो उन्हें रिहा कर दिया जाए।

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