जयपुरः राजस्थान के नागौर जिले के रहने वाले किसान मंगल चंद मेघवाल अब इस दुनिया में नहीं हैं. 4 अगस्त की रात उन्होंने आत्महत्या कर ली. मंगल चंद पर बैंक का लोन बकाया था. लोन चुकाने के लिए उन्हें थोड़ी मोहलत चाहिए थी लेकिन बैंक से उन्हें कोई राहत नहीं मिली. बैंक ने उनके खेत की नीलामी के आदेश जारी किए. नीलामी से तनाव में आए कर्जदार किसान मंगल चंद ने खुदकुशी कर ली.

मिली जानकारी के अनुसार, मंगल चंद शारीरिक रूप से अक्षम थे. उन्होंने साल 2010 में अपने तीन भाइयों के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए 2.98 लाख रुपए का कर्ज लिया था. किसानी में नुकसान होने के बावजूद परिवार ने लिए गए लोन में से 1.75 लाख रुपए जमा करवा दिेए थे. शेष लोन चुकाने के लिए मंगल के दो भाई 5-6 महीने पहले किसानी छोड़कर मजदूरी करने के लिए दूसरे राज्य चले गए.

इस बीच बैंक का दबाव बढ़ता गया और मंगल बैंक वालों को अपने भाइयों के लौट आने पर लोन चुकाने की दुहाई देने लगा, मगर बैंक वाले नहीं माने. रिकवरी करने वाले आए दिन परिवार को धमका रहे थे. 10 जुलाई तक पैसा जमा नहीं करने पर बैंक ने परिवार को जमीन कुर्क करने का नोटिस भेजा. मंगल का परिवार काफी दबाव में आ गया था. उसने मोहलत के लिए प्रशासन तक से मदद मांगी लेकिन कहीं से भी उसे कोई मदद नहीं मिली.

बैंक की ओर से साफ कहा गया कि 4 लाख 59 हजार रुपए जमा कराने के बाद ही आदेश वापस लिया जा सकता है. मंगल ने कई लोगों से मदद मांगी लेकिन हर ओर निराशा ही हाथ लगी. मंगल के परिवार ने बताया कि जमीन की नीलामी का नोटिस मिलने के बाद से मंगल बेहद परेशान था. वह ठीक से खाना भी नहीं खा रहा था. वह कहता था कि अगर जमीन उनके हाथ से निकल गई तो परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा.

आखिरकार मंगल ने खुद को इस तनाव से अलग करने का फैसला कर लिया और 4 अगस्त की रात पंखे से लटककर खुदकुशी कर ली. मंगल की मौत से क्षेत्र के किसानों में काफी आक्रोश है. सैकड़ों किसान न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए. उन्होंने कर्जमाफी, परिवार को 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की. किसानों को मांग पर अड़ता देख जिला प्रशासन के लोग पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे.

आखिरकार कई दौर में चली बातचीत के बाद प्रशासन ने परिवार का कर्ज माफ करने का आदेश दिया. साथ ही जमीन नीलामी का आदेश निरस्त करने, परिवार को उचित मुआवजा, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान और मंगल की भाभी को आंगनबाड़ी में नौकरी देने की बात कही. प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए और बैंककर्मियों के दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भरोसा भी दिलाया.

हालांकि बैंक अधिकारियों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि नियमों के अनुसार ही जमीन नीलामी के आदेश दिए गए थे. मंगल चंद का लोन एनपीए घोषित किया जा चुका था और एनपीए लोन पर ब्याज ज्यादा होता है. इसी वजह से उसके परिवार को 4 लाख 59 हजार रुपए जमा करने को कहा गया था.

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