Sunday, December 4, 2022

जानिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के बारे में, 106वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली: पण्डित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चिन्तक और संगठनकर्ता थे। वे भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष पद पर भी रहे। दीनदयाल उपाध्याय ने सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए भारत को एकात्म मानववाद नामक विचारधारा दी।

स्टेशन मास्टर थे पिता

पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर 1916 को मथुरा जिले के नगला चन्द्रभान गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम भगवती प्रसाद उपाध्याय और उनकी माता का नाम रामप्यारी था, पिता रेलवे में सहायक स्टेशन मास्टर थे। रेल की नौकरी होने की वजह से पिता का ज्यादा समय बाहर ही बीतता था। दीनदयाल अपने ममेरे भाइयों के साथ रहते थे।

दीनदयाल जब तीन वर्ष के हुए भी नहीं थे कि उनके पिता का देहान्त हो गया। पति की मृत्यु माँ अत्यधिक बीमार रहने लगी। 8 अगस्त 1924 को उनका भी निधन हो गया। उस समय दीनदयाल केवल 7 वर्ष के थे।

उपाध्याय जी का शिक्षा

8वीं की परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद उपाध्याय जी ने राजस्थान के कल्याण हाईस्कूल से दसवीं की परीक्षा में बोर्ड में प्रथम स्थान प्राप्त किया। 1937 में पिलानी से इंटरमीडिएट की परीक्षा में फिर से प्रथम स्थान प्राप्त किया। 939 में कानपुर के सनातन धर्म कालेज से बी.ए प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। एम.ए करने के लिए आगरा के सेंट जॉन्स कालेज प्रवेश लिया और प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए।

महामंत्री भी रहे पंडित दीनदयाल

1967 तक पंडित दीनदयाल भारतीय जनसंघ के महामंत्री रहे। 1967 में कालीकट अधिवेशन में दीनदयाल जी भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। केवल 43 दिन जनसंघ के अध्यक्ष रहे। 10/11 फरवरी 1968 की रात्रि में मुगलसराय स्टेशन पर किसी ने उनकी हत्या कर दी। 11 फरवरी को करीब 4 बजे सहायक स्टेशन मास्टर को शव की सूचना मिली।

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