नई दिल्ली : सरकार और किसानों के बीच चल रहा गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस बीच आज किसान और सरकार एक बार फिर आमने सामने आने वाले हैं और आठवें दौर की बातचीत करने वाले हैं. लेकिन, हर बार की तरह इस बार भी इस वार्ता का कोई लाभ होता नजर नहीं आ रहा है. क्योंकि किसान अपनी मागों पर पूरी तरह डटे हुए हैं. ऐसे में देखना यह होगा कि सरकार किसानों को इस बार कितना समझाने में कामयाब होती है. हालांकि सरकार ने कानूनों को वापस लेने से साफ इनकार किया हुआ है.

बता दें कि इससे पहले किसानों और सरकार के बीच सात बार बातचीत हो चुकी है, जिसका अभी तक कोई फायदा नहीं हो पाया है. क्योंकि एक तरफ केंद्र कानूनों को वापस लेने के अलावा हर प्रस्ताव पर विचार करने के लिए तैयार है वहीं किसान सिर्फ कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं. फिलहाल, दोनों पक्ष गतिरोध दूर करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. वहीं इसी कड़ी में हजारों किसानों ने कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे पर शुक्रवार को दिल्ली की सीमाओं पर अपने शिविरों से ट्रैक्टर मार्च निकाल कर प्रदर्शन किया है.

गौरतलब है कि आज आठवें दौर की वार्ता शुक्रवार को दो बजे विज्ञान भवन में होगी. इससे पहले चार जनवरी को हुई सातवें दौर की बैठक बेनतीजा रही जिसमें किसानों को यह कहते हुए सुना गया कि इन कानूनों से उनकी आय को नुकसान होगा और सरकार को ये कानून वापस लेने ही पड़ेंगे. ऐसें में अब किसानों और सरकार की आठवीं दौर की वार्ता महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इस बीच, ऐसी अफवाहें भी सुनने को मिल रही हैं कि कुछ राज्यों को केंद्रीय कृषि कानूनों के दायरे से बाहर निकलने की अनुमति दी जा रही है, लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि उन्हें सरकार से इस प्रकार का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है.

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