नई दिल्ली. हरियाणा भले ही जोड़-तोड़ की राजनीति का गढ़ रहा है और दुष्यंत चौटाला के परदादा चौधरी देवी लाल और भजन लाल को इस किस्म की सियासत का पुरोधा माना जाता है. लेकिन अब भारतीय जनता पार्टी में अमित शाह जैसा मैनेजर है जो पिछले सभी सियासी समीकरणों को पलटने का दम रखते हैं. दुष्यंत चौटाला की जनता जननायक पार्टी(जेजेपी) को हरियाणा विधानसभा में 10 सीटें मिली हैं. बीजेपी बहुमत से 6 सीटें पीछे यानी 40 सीटों पर सिमट गई. कांग्रेस को 31 सीटें मिलीं यानी वह जेजेपी के साथ मिलकर भी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है. ऐसे में जेजेपी के पास बीजेपी को समर्थन देने का ही विकल्प बचता था अगर उसे सत्ता में हिस्सेदारी चाहिए थी.

लेकिन वह अनिर्णय में फंसी रही कि किसको समर्थन दें इस बीज बीजेपी ने मनोहरलाल खट्टर को दोबारा सीएम बनाने का इंतजाम भी कर लिया. गोपाल कांडा से समर्थन लेने के नाम पर वरिष्ठ बीजेपी नेता उमा भारती के ट्वीट और सोशल मीडिया पर जबर्दस्त मुहिम का असर ये हुआ कि बीजेपी कांडा के समर्थन से पीछे हट  रही है. ऐसे में दुष्यंत चौटाला विरासत की राजनीति के दो चेहरों के बीच में खड़े हैं. तेजस्वी यादव की तरह वो उप मुख्यमंत्री के तौर पर विधायकी की शुरुआत करेंगे लेकिन जगन मोहन रेड्डी की तरह उन्होंने एक नई पार्टी को सत्ता तक पहुंचा दिया, साझेदार के तौर पर ही सही. 

हरियाणा में 24 अक्टूबर को नतीजा आने के बाद घटनाक्रम बहुत तेजी से घटा. इससे पहले कि दुष्यंत चौटाला अपनी पार्टी की मीटिंग करते बीजेपी ने गोपाल कांडा की बदौलत 7 निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटा लिया. मनोहरलाल खट्टर को दोबारा मुख्यमंत्री बनने के लिए किंगमेकर की जरूरत पड़ी ही नहीं. डिप्टी सीएम की कुर्सी और केंद्र में मंत्रालय बीजेपी दे सकती है दुष्यंत चौटाला की पार्टी को ऐसी खबरें आईं लेकिन उसी दौरान गोपाल कांडा हवाईजहाज में निर्दलीय विधायकों के साथ नजर आए. बात साफ हो गई कि खेल हो गया है. बीजेपी को 6 विधायकों की जररूरत थी चुनाव नतीजों के एक दिन बाद उसके पास 7 विधायकों अतिरिक्त आ गए. यानी बहुमत से भी दो ज्यादा. इसमें बबिता फोगाट को हराने वाले सोमवीर सांगवान बीजेपी के बागी उम्मीदवार ही थे.

गोपाल कांडा: 10 साल पहले भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार बनाई थी, अब  मनोहरलाल खट्टर की

गोपाल कांडा सिरसा के विधायक हैं. ठीक 10 साल पहले भी चुनावी नतीजे बिल्कुल ऐसे ही आए थे. तब कांग्रेस को 40 सीटें मिली थीं.  जितनी इस बार बीजेपी को मिली हैं. इनेलो को 31 सीटें मिली थीं जितनी इस बार कांग्रेस को मिली हैं. बीजेपी का जिक्र भी क्या करना उसे मात्र 4 सीटें मिली थीं. ऐसे में गोपाल कांडा ने तब भी कांग्रेस की सरकार बनवाई थी. निर्दलीय विधायकों को कांग्रेस को समर्थन देने पर राजी किया. हरियाणा जनहित कांग्रेस के 6 विधायकों ने भी कांग्रेस को समर्थन दिया और भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार बनी. गोपाल कांडा को गृह राज्य मंत्री बनाया गया. लेकिन एयरहोस्टेस गीतिका शर्मा की आत्महत्या में फंसने के बाद गोपाल कांडा को हटा दिया गया. 10 साल बाद गोपाल कांडा ने वहीं किया बस इस बार कांग्रेस की जगह बीजेपी है. गोपाल कांडा ने जैसे ही छह विधायकों के साथ प्लेन में सेल्फी डाली, यह साफ हो गया कि दुष्यंत चौटाला किंगमेकर नहीं बनने जा रहे हैं. 

सोशल मीडिया ने कांडा के साथ कांड कर दिया

गोपाल कांडा ने बीजेपी को समर्थन देने की बात कह दी, यहां तक कहा कि उसके पिताजी 1926 से आरएसएस के सदस्य हैं. उसकी रगों में संघी खून है. हरियाणा की सिरसा विधानसभा की जनता ने उसे विधायक भी बना दिया. लेकिन सोशल मीडिया को गीतिका शर्मा की आत्महत्या याद थी. उसका सुसाइड नोट याद था. बीजेपी की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने भी ट्विटर पर ताबड़तोड़ पांच ट्वीट करके गोपाल कांडा के साथ न जाने की ताकीद की. सोशल मीडिया पर #GopalKanda ट्रेंड करता रहा और बीजेपी को लोग शर्मसार करते रहे. लोग गीतिका शर्मा का सुसाइ़ड नोट शेयर करने लगे आखिरकार बीजेपी को दुष्यंत चौटाला की याद आई. अनुराग ठाकुर ने दुष्यंत को बीजेपी के साथ लाने में बड़ी भूमिका निभाई. 

पढ़िए उमा भारती ने क्या कहा

 

दुष्यंत चौटाला जगनमोहन बनेंगे या तेजस्वी?

बिहार में 2015 विधानसभा चुनावों में वो दो पार्टियां एक साथ आ गईं जिनकी राजनीति ही एक दूसरे के विरोध पर टिकी थी. नीतिश कुमार की जदयू और लालू यादव की आरजेडी ने गठबंधन कर लिया. बीजेपी और जदयू का डेढ़ दशक पुराना साथ टूट चुका था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजयरथ बिहार में ही थमा. आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. नीतीश कुमार का सीएम बनना तो तय था क्योंकि लालू खुद इसकी घोषणा कर चुके थे. लेकिन उप मुख्यमंत्री का पद मिला लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव को. पहली बार विधायक बने और सीधे उप मुख्यमंत्री.

वहीं दूसरा किस्सा आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी का है. पिता वाईएसआर रेड्डी की मौत के बाद कांग्रेस ने उन्हें उनकी याद में राज्य की यात्रा करने से रोक दिया. जगन ने कांग्रेस को आंध्र प्रदेश की सत्ता से अकेले दम पर बाहर कर दिया.उनकी पार्टी वाईएसआर ने राज्य से कांग्रेस को तो बिल्कुल सफाया कर दिया और चंद्रबाबू नायडु को लगभग खत्म कर दिया. दुष्यंत चौटाला बीच में खड़े हैं. उनके पिता और दादा इस वक्त जेल में हैं. उन्हें भी अपनी पार्टी से निकाला गया. गोपाल कांडा से समर्थन लेने पर हुई चौतरफा निंदा के बाद बीजेपी किसी सूरत उसके साथ खड़ी नजर नहीं आना चाहेगी. ऐसे में दुष्यंत चौटाला के पास डिप्टी सीएम पद की पेशकश की गई है. यह देखना दिलचस्प होगा कि दुष्यंत चौटाला की सियासत किस ओर जाती है. राजनीति उन्हें विरासत में मिली है ठीक वैसे ही जैसे तेजस्वी यादव को मिली थी. लेकिन सत्ता तक दुष्यंत अपनी मेहनत से पहुंचेंगे जैसा जगनमोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश में किया है.

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Dushyant Chautala JJP Profile: जगन मोहन रेड्डी की तर्ज पर हरियाणा में चमके दुष्यंत चौटाला, जेजेपी अध्यक्ष में लोकदल चीफ चौधरी देवीलाल की परछाई देख रहे जाटलैंड के वोटर्स

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