नई दिल्ली/ देश में कोरोना अपना कहर बरपा रहा है। कोरोना मरीज दिन पर दिन बढ़ते ही जा रहे है। एक एक सांस के लिए मरीजों को जंग लड़नी पर रही है। कोरोना मरीजों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी ऑक्सीजन थेरेपी है। कोरोना मरीजों की जिंदगी की आस केवल ऑक्सीजन पर टिकी है, लेकिन ऑक्सीजन की कमी लगातार बढ़ती जा रही हैं। हालात यह है कि जिन बड़े अस्पतालों में 4 दिन से भी ज्यादा का ऑक्सिजन स्टॉक में रहता था, अब वहां पर कुछ घंटे के लिए ही ऑक्सिजन बची है।

दिल्ली पुलिस लगातार ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरतों को पूरा करने में लगे है ताकि कई मरीजों की जान बचाई जा सके। सरकारी और प्राइवेट हर अस्पताल को ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ रहा हैं। दिल्ली के माता चन्ना देवी अस्पताल में 120 मरीज ऑक्सीजन की कमी का सामना कर रहे है और अपनी जान से खेल रहे है। वहीं संतम अस्पताल में भी 130 मरीज ऑक्सीजन की कमी का सामना कर रहे है और सरोज सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 130 ऑक्सीजन की कमी से डरे हुए है। वहीं राठी अस्पताल में 78 मरीज ऑक्सीजन की कमी से अपनी जिंदगी से हाथ धो सकते है।

दिल्ली के सेंट स्टीफंस अस्पताल के असोसिएट मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर जॉन पुनुज ने बताया कि बुधवार को सवा सवा 5 बजे तक उनके अस्पताल में करीब 40 से 50 मिनट की ऑक्सिजन बची है। इस वक्त अस्पताल में लगभग 350 मरीज ऑक्सिजन सपोर्ट पर हैं। ऐसे में यदि समय पर ऑक्सिजन नहीं पहुंची तो स्थिति बेहद खराब हो सकती है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर चल रही है, जो बहुत ही घातक है। भारत में फिलहाल एक्टिव मामले 21.5 लाख से ज्यादा हैं। ऐसे में ऑक्सीजन की कमी बहुत ही बड़ा मुद्दा है। हजारों लोगों की जान जा रही है और केंद्र बेखबर है।

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