नई दिल्ली. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई के उम्मीदवार विकास यादव नामांकन रद किए जाने के मामले में सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे. दिल्ली हाईकोर्ट ने विकास यादव की उम्मीदवारी कैंसिल करने के मामले पर स्टे दे दिया है. इस मामले में टिप्पणी करते हुए जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल ने कहा कि विकास यादव की उम्मीदवारी रद करने के लिए जो तथ्य बताए गए हैं वे ग्राउंड लेवल पर ठहराऊ नहीं हैं. कोर्ट ने कहा कि विकास यादव को उम्मीदवारी रद करने से पहले यह भी नहीं बताया गया था कि किस आधार पर यह फैसला लिया गया है. इस मामले पर अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी. तब तक उनकी उम्मीदवारी रद करने पर रोक जारी रहेगी.

वहीं दूसरी तरफ जेएनयू की शिकायत निवारण समिति (जीआरसी) ने भी चुनाव समिति से विकास यादव का नामांकन रद सिफारिश की है. जेएनयू में 14 सितंबर को छात्रसंघ का चुनाव होना है. एक पुराने मामले को लेकर एनएसयूआई के उम्मीदवार विकास यादव का नामांकन रद कर दिया गया था. इस मामले पर विकास ने कहा था कि वे अपना नामांकन रद करने के खिलाफ कोर्ट जाएंगे. सोमवार को वे कोर्ट पहुंचे जहां उन्हें राहत मिल गई है. कोर्ट ने विकास यादव का नामांकन रद करने के कारणों को कमजोर मानते हुए जेएनयू प्रशासन के आदेश पर स्टे दे दिया है.

बता दें कि विकास यादव पर जेएनयू परिसर में सड़क बंद करने के आरोप में 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था. इस मामले पर विकास कोर्ट गए थे जहां से उन्हें राहत मिल गई. कोर्ट ने जेएनयू प्रबंधन को दोबारा जांच के आदेश दिए थे. इस मामले पर विवि प्रबंधन ने अभी दोबारा जांच शुरू भी नहीं की है इस बीच ग्रीवांस सेल ने उस मामले के आधार पर विकास का नामांकन रद करने का फैसला सुना दिया था.

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