नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव की वोटिंग 8 फरवरी को होगी. रिजल्ट 11 फरवरी को आएगा. राजधानी में चुनाव कई मुद्दों पर है लेकिन जिसने मुद्दा न होकर भी सबका ध्यान खींचा वो है शाहीन बाग में महिलाओं को सीएए- एनआरसी के खिलाफ धरना. खास बात है कि सत्ताधारी पार्टी और सीएम अरविंद केजरीवाल इस मुद्दे पर चुप हैं. यहां तक की मुस्लिम इलाकों में रोड शो करने से भी बचते नजर आए हैं.

वहीं विपक्षी दल बीजेपी इस मुद्दे पर कांग्रेस और आप पर हमलावर है. कांग्रेस भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में जाकर मुस्लिम वोटर्स को लुभाने की पूरी कोशिश में है. ऐसे में कहीं न कहीं केजरीवाल की चुप्पी उन्हें ही नुकसानदायक होगी.

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार के कार्यों से करीब-करीब लोग खुश हैं. हाल ही में हुए ओपिनियन पोल्स को देखकर भी कुछ ऐसे ही महसूस भी होता है. लेकिन शाहीन बाग से अगर वोटों का ध्रूवीकरण हुआ तो मामला थोड़ा उलट सकता है. अगर काफी संख्या में वोट धार्मिक आधार में हो गई तो उसका सीधा फायदा भाजपा और कांग्रेस को जाएगा.

भाजपा को कैसे फायदा ?
दिल्ली चुनाव में बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी के साथ-साथ कई मंत्री और सांसद जमकर प्रचार में लगे हैं. हाल ही में शाहीन बाग को लेकर कई भाजपा नेताओं के विवादित बयान भी सामने आए. भाजपा प्रत्याशी कपिल मिश्रा ने तो दिल्ली चुनाव सीधा हिंदूस्तान और पाकिस्तान का मुकाबला कह डाला.

बीजेपी के लिए शाहीन बाग का विरोध ही उनका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है. किसी न किसी तरह अगर लोगों के मन में यह संदेश जाता है कि ये सभी विरोध प्रदर्शन विपक्ष की चाल है तो वोटर्स का मोह भाजपा की ओर बढ़ सकता है.

कांग्रेस को फायदा कैसे ?
वैसे दिल्ली में कांग्रेस की हालात बेहद ठीक तो नहीं है लेकिन अगर केजरीवाल ऐसे ही शाहीन बाग के मुद्दे पर चुप रहे या मुस्लिम इलाकों में रैली करने से बचते रहे तो अल्पसंख्यक वोटर्स का मन कांग्रेस की ओर जा सकता है. क्योंकि केजरीवाल की चुप्पी मुस्लिम वोटर्स को खफा करने के लिए काफी है. खैर अब जो होगा वो तो 8 फरवरी और 11 फरवरी को होगा.

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