नई दिल्ली. रानी झांसी रोड दिल्ली की अनाज मंडी में आज रविवार को सुबह 5.22 बजे छह मंजिला फैक्ट्री में भीषण आग लगने से अब तक (खबर लिखने तक) 43 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हैं. जब फैक्ट्री के अंदर आग लगी तो 50 से अधिक लोग इसके अंदर थे. आग लगने की सूचना पाकर 30 दमकल गाड़ियों को मौके पर रवाना किया गया था और इसके बाद आग पर काबू पाया गया.

हालांकि आग इतनी भीषण थी कि दमकल की गाड़िया पहुंचने से पहले ही बहुत कुछ नुकसान हो चुका था, इस संबंध में अग्निशमन अधिकारियों ने कहा कि फंसे हुए 56 लोगों को बचाया गया और राम मनोहर लोहिया अस्पताल और हिंदू राव अस्पताल ले जाया गया है. इसके बाद दिल्ली सरकार मृतकों को 10- 10 लाख का मुआवजा देने का ऐलान किया है. घायलों का 1- 1 लाख रुपये मिलेगा इसके साथ ही उनका मुफ्त इलाज होगा. वहीं दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी ने बीजेपी की तरफ से मृतकों को 5-5 लाख मुआवजा देने की घोषणा की है.

मुआवजा देकर हादसे रोके जा सकते हैं.

दिल्ली में यह पहली बार नहीं हुआ है कि आग लगी हो और लोग मरे हों और इन्हें मुआवजा मिल रहा हो. इससे पहले भी ऐसे कई हादसे हो चुके हैं लेकिन सरकार सिर्फ मुआवजा देकर मामले शांत करके बैठ जाती है. कभी किसी ने सोचा है कि आग लगने की वजह क्या होती है और अगर आग लग भी जाती है तो क्या वहां पर फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं होते. इसके साथ ही अगर किसी फैक्ट्री में आपको फायर सेफ्टी के इंतजाम मिल भी जाएं तो उसका इस्तेमाल कैसे होता है ये वहां मौजूद किसी कर्माचारी को पता होता है. कई सवाल है जिनके जवाब शायद नहीं मिलेगें.

फायर ब्रिगेड की गाड़ी क्यों लेट पहुंचती हैं

देश की राजधानी दिल्ली में जब फायर ब्रिगेड की गाड़ी समय से नहीं आ पाती तो सोचिए छोटे शहरों में क्या हाल होता होगा. अगर गाड़ी समय से घटनास्थल के आस-पास पहुंच भी जाए तो उसे घटनास्थल पर पहुंचने में भी समय लगता है. इसके पीछे की वजह है कि दमकल की गाड़ियां संकरी गलियों में से नहीं निकल पाती हैं और इसकी वजह से कई लोग आग में झुलस कर मर भी जाते हैं.

क्यों रहता है हादसे का इंतजार

गरीब मजदूर लोग देश की राजधानी में काम-काज के लिए आते हैं और ये सभी लोग कभी-कभी फैक्ट्री में ही रहकर अपना पालन पोषण करते हैं. फैक्ट्रियों के मालिक तो इनसे सिर्फ काम निकलवाने के लिए बात करते हैं. हालांकि सरकार का ध्यान ये भी हो कि जो लोग इस तरह से रह रहे हैं उनके लिए कंपनी के मालिक ने सुरक्षा के इंतजाम क्या किए हैं. अगर उनके लिए सुरक्षा के सही इंतजाम नहीं है तो क्यों न वह मालिक से कहकर कुछ करवाएं ताकि इस तरह के हादसे न हों. अगर किसी तरह का हादसा होता भी है तो उससे निपटने के लिए क्या वह पूरी तरह से तैयार हैं. अगर हादसों से निपटने के लिए पहले से तैयार रहें तो इतना बड़ा नुकसान नहीं हो सकता है.

हादसों पर क्यों होती है राजनीति

आग लगी और लोग मर गए इधर राजनीति की आंच पर रोटी भी सेकने लग गए हैं. दिल्ली में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं इसलिए दिल्ली सरकार और बीजेपी ने हादसे की वजह को महत्व ने देकर मुआवजे का ऐलान किया है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मृतकों को 10-10 लाख और बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने पार्टी की तरफ से 5-5 लाख मुआवजा देने का ऐलान किया है.

अगर मुआवजा देकर मृतकों के परिवार को शांत करके हादसे रोक जा सकें तो ये बिल्कुल ठीक है मुआवजा बस लोगों की आर्थिक रूप से मदद कर सकता है. अगर सरकार इन हादसों को वाकई में रोकना चाहती है तो सबसे पहले सेफ्टी के इंतजाम पर ध्यान दे.

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