नई दिल्लीः दिल्ली में अतिक्रमण एक गंभीर समस्या बनता जा रहा जिससे दिल्ली विकास प्राधिकरण यानि डीडीए भी आए दिन जूझता रहता है. आए दिन डीडीए के किसी जमीन पर कब्जा हो जाता है जिसे छुड़ाने के लिए काफी मेहनत मशक्त करनी पड़ती है. इस अतिक्रमण की समस्या से बचने के लिए डीडीए ने एक असरदार तरीका खोज निकाला है. डीडीए अपने खाली पड़े प्लाटों में से 147 प्लॉट्स को चुना है जिनको नीलामी द्वारा दिया जाएगा. इस सभी जमीनों के लिए अप्रैल के आखिर तक ई ऑक्शन के जरिए बिडिंग होगी जिसके बाद ये जमीनें आवंटित की जाएंगी.

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक नीलामी के लिए चुनी गई सभी जमीनों के लिए बेसिक रिजर्व प्राइज फिक्स किया जा चुका है. जो कि सरकारी सर्कल रेट के मुताबिक तय किये गए हैं. नीलामी में डाली जा रही जमीनों में कई प्रकार की जमीनें हैं जिसमें आवासीय, व्यवसायिक, इंड्रस्ट्रियल, शैक्षणिक जैसे स्कूल, कॉलेज, अस्पताल आदी शामिल हैं. ये 147 प्लाट्स दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में हैं. जिनमें पीतमपुरा, विवेक विहार, जनकपुरी, कोंडली, रोहिणी द्वारका शामिल हैं.

डीडीए की तरफ से की जा ईस ऑक्शन के पीछे सबसे बड़ा कारण सामने आया है अतिक्रमण की चुनौती से निपटना. जिसमें जमीन की बिडिंग हो जाने के बाद उस पर अतिक्रमण नहीं हो पाएगा. साथ ही लंबे समय से खाली पड़ी जमीनों पर भी विकास हो सकेगा. और सबसे बड़ी बात डीडीए की आमदनी भी बढ़ेगी. इस ईबिडिंग के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. जो इस महीने के आखिर में शुरू हो जाएंगे. साथ ही डीडीए इस बिडिंग के लिए न्यूजपेपर, रेडियो आदि की मदद लेने पर भी विचार कर रहा है.

डीडीए द्वारा की जा रही खाली पड़ी जमीनों की नीलामी को पिछले साल 2017 में ही किया जाना था लेकिन कुछ कारणों के चलते ये प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई थी. ये कारण थे खाली पड़ी जमीन का लीगल स्टेट्स पता करना, जमीन पर चल रहे वाद विवाद के बारे में पता करना, जमीन पर हरियाली का पता करना कि उसपर कितने पेड़ हैं. इन सभी बातों को क्लियर करने के बाद नंबर आता है शेयर मार्केट का जिसके उतार चढ़ाव को देखकर ही बिडिंग की डेट तय की जाती है. पिछले साल के अंत में शेयर मार्केट की खस्ता हालत के चलते ये ई बिडिंग नहीं हो पाई थी.

 

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