नई दिल्ली. यूपी के एनसीआर जिलों में सोमवार से 18 से 44 साल के लोगों को वैक्सीन लगनी शुरू हुई हैं। हालांकि केंद्र की ओर से तय किए गए तारीख से ये 10 दिन पीछे चल रहा है। अब सोमवार को सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं। वैक्सीन लगवाने के लिए गाजियाबाद और नोएडा में उन्हीं लोगों पात्र माना जाएगा इनका पता यूपी का है।

ये वैक्सीनेशन सिर्फ यूपी के लोगों के लिए ही है। पते के साक्ष्य के तौर पर आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पहचान पत्र व राशनकार्ड जैसे कागजात की जरूरत होगी।

सिर्फ यूपी के लोग ही होंगे शामिल

एक पत्र के द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के द्वारा ये बताया गया कि यह साफ किया जाता है कि 18 से 44 साल के लोगों के लिए वैक्सीन की खरीददारी राज्य सरकार की ओर से की गई है। यह तय किया जाए कि जो भी सरकारी वैक्सीनेशन सेंटर पर टीका लगवाने आ रहा है वो उत्तर प्रदेश का बाशिंदा हो। सरकारी वैक्सीनेशन सेंटर पर किसी दूसरे राज्य के लोगों को कोविड 19 का टीका नहीं लगना चाहिए। 

मजदूरों का क्या होगा

सरकार के इन आदेश के बाद अब सवाल ये भी खड़ा हो गया है कि नोएडा में रहने वाले मजदूरों का क्या होगा। दरअसल, नोएडा एक इंडस्ट्रियल और कॉरपोरेट सेंटर है जहां बड़ी संख्या में बाहरी मजदूर काम के सिलसिले में आकर रहते हैं। बड़ी समस्या ये है कि उनके आईडी प्रूफ पर उनके राज्यों का पता होता है। ऐसे में इस फैसले से ये सारे लोग टीकाकरण से वंचित रह जाएंगे।

क्या बर्बाद होगी वैक्सीन

जैसे ही वैक्सीनेशन का स्लॉट खुला वो शनिवार तक बुक हो गया। इसके अलावा बाकी और कोई इसमें भाग नहीं ले सकता है। ऐसे में वैक्सीनेशन के दौरान जिनका पता यूपी का नहीं होगा वो टीका नहीं लगवा पाएंगे। यानी जो स्लॉट के हिसाब से वैक्सीन है वो वेस्ट होगी।  

गाजियाबाद ने अपने रोजाना टीकाकरण का लक्ष्य 3100 जबकि नोएडा ने ये लक्ष्य 2800 रखा है। जबकि इसके लिए 16 सरकारी सेंटर्स बनाए गए हैं। हालांकि निजी संस्थानों में यूपी का पता साथ लाना जरूरी नहीं है लेकिन बहुत कम निजी संस्थान हैं जो इस एज ग्रुप के लोगों को टीका लगा रहे हैं। 

निजी टीकाकरण की राह भी नहीं आसान

अपोलो, मैक्स और फोर्टिस जैसे 3 अस्पतालों ने ये ऐलान किया था कि वो 18 से ऊपर आयु के लोगों का टीकाकरण करेंगे। लेकिन ऐसा भी देखा गया है कि पहली डोज लगवाने के बाद लोगों को दूसरी डोज के लिए भटकना पड़ रहा है। यानी सरकारी केंद्र पर टीका लगाने के लिए अभी भी लोगों को मशक्कत करनी पड़ेगी। जिससे परेशानी का हल नहीं दिख रहा।

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