नई दिल्लीः केंद्र सरकार द्वारा हज सब्सिडी खत्म करने के ऐलान को अभी एक माह भी नहीं बीता है कि नगालैंड चुनाव में बीजेपी ने नया शिगूफा छेड़ दिया है. बीजेपी ने चुनाव से पहले ईसाई वोटरों को लुभाने के लिए चुनावी वादा किया है कि अगर वह सत्ता में आते हैं तो सभी ईसाइयों को येरूशलम की मुफ्त यात्रा पर भेजेंगे. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि बीजेपी की ओर से कही गई यह बात नॉर्थ-ईस्ट में रहने वाले ईसाई समुदाय पर लागू होगी या फिर देश भर के समुदाय पर. बताते चलें कि नॉर्थ-ईस्ट राज्य मेघालय, नगालैंड और त्रिपुरा में इसी साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव में सत्ता पर काबिज होने के लिए बीजेपी पूरा दमखम लगा रही है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूज एजेंसी UNI के अनुसार बीजेपी ने नगालैंड में ईसाई समुदाय से चुनावी वादा करते हुए उन्हें सत्ता में आने पर येरूशलम की धार्मिक यात्रा पर भेजने का ऐलान किया है. इस यात्रा के लिए उनसे (क्रिश्चियन कम्युनिटी) किसी भी तरह का शुल्क न वसूले जाने की बात कही गई है. मेघालय और नगालैंड की बात करें तो इन दोनों ही राज्यों में ईसाई समुदाय बहुसंख्यक है. मेघालय में राज्य की कुल आबादी का 75 प्रतिशत और नगालैंड में करीब 88 प्रतिशत लोग ईसाई समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. बीजेपी के इस ऐलान के बाद इसका विरोध भी हो रहा है. AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘बीजेपी ने ईसाइयों को मुफ्त येरूशलम की धार्मिक यात्रा पर भेजने का वादा किया है. मैं सही था, चुनावी जरूरत के लिए बीजेपी इस तरह से सब्सिडी देना जारी रखेगी. ये बीजेपी का इंडिया फर्स्ट हैं.’

येरूशलम पोस्ट ने लिखा है कि बीजेपी ने नगालैंड में ईसाई समुदाय के लोगों को येरूशलम की मुफ्त यात्रा का वादा किया है. यह कोई नई बात नहीं है, चुनाव के दौरान अक्सर पार्टियां कुछ ऐसे ही वादे करती हैं. नाइजीरिया का उदाहरण देते हुए येरूशलम पोस्ट ने लिखा है कि नाइजीरियाई सरकार हर साल मुस्लिमों के लिए मक्का यात्रा पर आर्थिक मदद देती है तो वहीं ईसाइयों को भी येरूशलम की धार्मिक यात्रा में आर्थिक तौर पर मदद करती है. साल 2011 में 42 हजार नाइजीरियाई नागरिक येरूशलम की धार्मिक यात्रा पर आए थे. बताते चलें कि जिस तरह से हिंदुओं में कैलाश मानसरोवर यात्रा, मुस्लिमों में हज यात्रा महत्व रखती है, ठीक उसी तरह ईसाई समुदाय के लिए येरूशलम यात्रा का खासा महत्व है.

गौरतलब है कि पिछले महीने केंद्र सरकार के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने ऐलान किया था कि सरकार हज सब्सिडी खत्म करने जा रही है. नकवी ने कहा था कि हज सब्सिडी पर खर्च किया जाने वाला पैसा अब मुस्लिम बच्चियों की शिक्षा पर खर्च किया जाएगा. सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के सम्मान में यकीन रखती है न कि उन्हें हीन भावना का एहसास दिलाने में. कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए कहा कि हज सब्सिडी पर सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में कहा था कि इसे 10 साल में समाप्त कर दिया जाए मगर सरकार ने बेहद जल्दबाजी दिखाते हुए 2018 में ही सब्सिडी खत्म कर दी. उस दौरान सांसद ओवैसी ने कहा था कि अगर हज पर दी जाने वाली सब्सिडी खत्म हो सकती है तो हिंदुओं की धार्मिक मानसरोवर यात्रा पर दी जा रही सब्सिडी क्यों खत्म नहीं हो सकती?

नगालैंड विधानसभा चुनाव: बैपटिस्ट चर्च ने लिखा सभी दलों को खुला खत, राज्य में खतरा है बीजेपी, इसे वोट ना करें