रामपुर. उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और सपा नेता आजम खान ने रामपुर से बीजेपी प्रत्याशी जया प्रदा को लेकर अभद्र बयान दिया है. आजम खान ने सपा-बसपा और आरएलडी महागठबंधन के लिए लोकसभा चुनाव प्रचार करते हुए कहा ”जिसको हम उंगली पकड़कर रामपुर लाए, आपने 10 साल जिनसे प्रतिनिधित्व कराया, उसकी असलियत समझने में आपको 17 साल लगे लेकिन मैं 17 दिनों में पहचान गया हूं कि इनका अंडरवियर खाकी रंग का है.” सूत्रों की मानें तो आजम खान के बयान पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने संज्ञान लेते हुए, इसकी शिकायत चुनाव आयोग में करने के लिए कहा है.

आजम खान ने जनसभा में मौजूद सभी लोगों से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या राजनीति इतनी गिर जाएगी कि 10 साल जिसने रामपुर के लोगों का खून पिया, जिसकी उंगली पकड़कर हम रामपुर लेकर आए, जिसका हमने पूरा ख्याल रखा. उसने हमारे पर क्या-क्या आरोप नहीं लगाए.

क्या हैं आजम खान के बयान के मायने?
हालांकि आजम खान ने बयान देते हुए किसी का नाम तो नहीं लिया लेकिन उनके निशाने पूरी तरह से जया प्रदा थीं. जया प्रदा रामपुर लोकसभा सीट पर साल 2004 से लेकर 2014 तक समाजवादी पार्टी से सांसद भी रही हैं. हाल ही में बीजेपी में शामिल हो गईं, जिसको लेकर आजम खान ने जया प्रदा के खिलाफ आपत्तिजनक भाषण दिया है.

आजम खान ने जया प्रदा को कहा था नाचने वाली
आजम खान और जया प्रदा की तकरार कोई नई नहीं है. कुछ समय पहले भी आजम खान ने जया प्रदा को नाचने वाली कहा था. भाजपा के कई नेताओं ने इस बात का विरोध भी किया था. वहीं जया प्रदा ने हाल ही में इस बारे में कहा कि जिसको उन्होंने भाई कहा, उसी भाई ने नाचने वाली कहा. उन्होंने मुझे हमेशा जलील किया, हमेशा मुझे अपमानित किया. इसके साथ ही जया प्रदा ने कहा था कि आजम खान होश में नहीं है और ये कुछ भी कर सकता है.

जया प्रदा फिल्म पद्मावत के खिलजी किरदार से की थी आजम की तुलना
साल 2018 में भी आजम खान और जया प्रदा का एक विवाद सामने आया था. जब जया प्रदा ने आजम खान की तुलना बॉलीवुड फिल्म पद्मावत के किरदार अलाउद्दीन खिलजी से की थी, जो कि अपने समय में एक बेहद ही क्रूर शासक रहा था.

कभी जया प्रदा की वजह से आजम खान ने समाजवादी पार्टी से बना ली थी दूरी
साल 2004 में जया प्रदा के लिए रामपुर के घर-घर वोट मांगकर उन्हें जीत दिलाने वाले आजम खान उनके राजनीतिक शत्रु बन जाएंगे, किसी ने नहीं सोचा था. आजम खान और जया प्रदा के बीच काफी अच्छी दोस्ती भी रही लेकिन 2009 लोकसभा चुनाव से पहले सबकुछ बदल गया.

उस दौरान आजम खान ने काफी प्रयास किए कि जया प्रदा को समाजवादी पार्टी अपना उम्मीदवार न घोषित करे. हालांकि, ऐसा नहीं हुआ औऱ सपा से एक बार फिर जया प्रदा को टिकट दिया गया. इस दौरान आजम खान ने पार्टी से नाराज होकर दूरी बना ली.

हालांकि साल 2010 में आजम खान फिर सपा में वापस आए और कुछ ही दिनों बाद जया प्रदा को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. साल 2014 में जया प्रदा ने अजीत सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल के टिकट से चुनाव लड़ा और हार गईं.

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