नई दिल्लीः जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले आर्टिकल 35ए पर सुप्रीम कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई को  जनवरी 2019 के दूसरे हफ्ते तक टाल दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके पीछे जम्मू कश्मीर में होने वाले निकाय चुनावों के लिए कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए सुनवाई आगे के लिए टाल दी है. इस सुनवाई से पहले राज्य को मिले विशेष राज्य के दर्जे में बदलाव की कोशिशों के खिलाफ घाटी में अलगावादी संगठनों ने 30 और 31 अगस्त को बंद का ऐलान किया है. अलगाववादियों द्वारा बुलाए गए बंद के बाद घाटी में होने वाले शादी के समारोह में बाधा पड़ती हुई दिखाई दे रही है. जिसके तहत राज्य में इन दो दिनों में होने वाली कई शादियां रद्द की जा चुकी है. इसको देखते हुए राज्य में लॉ एंड ऑर्डर को सख्ती से लागू करने के लिए इंतजाम किए गए हैं. किसी भी अप्रिय या हिंसक घटना होने की आशंका के बाद संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाया गया है.

जम्मू-कश्मीर को स्पेशल स्टेट का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 35-A के तहत भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर कोई भी जमीन नहीं खरीद सकते. सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली की संस्था वी द सिटिजन की तरफ से आर्टिकल 35ए को भेदभावपूर्ण बताते हुए इसके खिलाफ याचिका दर्ज की गई है जिसके विरोध में घाटी में सक्रिय कई अलगाववादी संगठनों ने दो दिनों के बंद का ऐलान किया है. जिमसें 30 और 31 अगस्त को पूरी घाटी को बंद रखा जाएगा. आर्टिकल 35ए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर 31 अगस्त को सुनवाई होनी है.

क्या है आर्टिकल 35 ए का पूरा विवाद

आर्टिकल 35 ए जम्मू कश्मीर को देश के अन्य राज्यों से अलग बनाते हुए विशेष राज्य का दर्जा देता है जिसमें राज्य के स्थायी निवासियों को विशेष अधिकार दिए गए हैं और इसके साथ ही राज्य से बाहर के किसी निवासी से शादी करने वाली महिला से उसकी संपत्ति छीनने का भी अधिकार देता है. इसके अलावा राज्य से बाहर का कोई भी व्यक्ति राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही किसी भी योजना का लाभ नहीं ले सकता और न ही वहां सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर सकता है. इस आर्टिकल को 14 मई 1954 को राष्ट्रपति द्वारा आदेश दिए जाने के बाद संविधान में जोड़ा गया था.

दिल्ली की एनजीओ वी द सिटिजन ने सुप्रीम कोर्ट में इस अनुच्छेद को भेदभाव पूर्ण बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उसके उन प्रावधानों को चुनौती दी है जिसमें किसी बाहर के व्यक्ति से शादी करने के बाद उस महिला को संपत्ति के अधिकार से वंचित कर दिया जाता है जिसमे यह प्रावधान उस महिला के बेटे पर भी लागू होता है.

इस मामले में याचिका दाखिल करने वाली संस्था वी द सिटिजन की तरफ से उनके वकील बिमल रॉय ने कहा कि अगर कोई महिला जम्मू-कश्मीर से बाहर रहने वाले किसी व्यक्ति से शादी करती है तो वह अपने ही राज्य में संपत्ति के अधिकार से वंचित हो जाती है. इसके साथ ही वह राज्य में रोजगार के अवसरों से भी वंचित हो जाती है. इसके बाद उन्होंने कहा, राज्य के अस्थायी निवास प्रमाणपत्र को रखने वाले व्यक्ति लोकसभा चुनाव में वोट डाल सकते हैं लेकिन घाटी में होने वाले स्थानीय चुनावों में उनको वोट डालने का अधिकार नहीं है.

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