मुंबईः किसानों के लिए पेंशन, लोकपाल की नियुक्ति सहित कई मांगों को लेकर एक बार फिर प्रसिद्ध गांधीवादी समाजसेवी अन्ना हजारे मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने जा रहे हैं. अन्ना हजारे ने 2 अक्टूबर से भूख हड़ताल करने का फैसला किया है. सोमवार को बयान जारी कर कहा गया कि अन्ना हजारे ने देश के किसानों को दुर्दशा से उबारने के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफरिशों को लागू करने की मांग की है. किसान पिछले कुछ वर्षों से बेहद आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं. किसानों के हक के लिए अन्ना हजारे दो अक्टूबर से भूख हड़ताल पर बैठेंगे.

अन्ना हजारे का यह आंदोलन रालेगण सिद्धि में होगा. अन्ना की ओर से अनशन की घोषणा करते हुए कहा गया कि बार-बार आग्रह के बावजूद केंद्र सरकार ने किसानों की दुर्दशा पर ध्यान नहीं दिया. अन्ना हजारे के एक करीबी ने बताया कि उन्होंने देश के प्रत्येक किसान के लिए पांच हजार रूपये प्रति माह पेंशन की मांग की है. इसके अलावा केंद्र में लोकपाल पर राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति करने, किसानों को उनके उत्पादन का डेढ़ गुना बाजार भाव देने और और चुनाव प्रक्रिया में सुधार लाने की मांग के लिए इस बार अन्ना भूख हड़ताल पर बैठेंगे.

सोमवार को अन्ना ने कहा कि इन मांगों के बारे में वह कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिख चुके हैं, लेकिन उनकी मांगों को लेकर मोदी सरकार का रवैया सकारात्मक नहीं दिखाई दे रहा है. लिहाजा वह सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं. गौरतलब है कि अन्ना हजारे किसानों के हक संबंधी अपनी मांगों को लेकर इस साल मार्च में भी दिल्ली के रामलीला मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे थे. केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद उन्होंने अनशन तोड़ दिया था.

अन्ना हजारे ने फिर दी मोदी सरकार को आंदोलन की चेतावनी, गांधी जयंती से शुरू कर सकते हैं अनशन