अलवरः अकबर उर्फ रकबर खान लिंचिंग केस में राजस्थान पुलिस ने कोर्ट में 25 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है. चार्जशीट में कहा गया है कि रकबर को पुलिस ने नहीं बल्कि भीड़ ने मारा था. चार्जशीट में चार आरोपियों का नाम है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें इस बात का भी खुलासा किया गया है कि रकबर खान की हत्या एक सोची-समझी साजिश थी. हमले के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और रकबर को अस्पताल ले गई. अस्पताल ले जाने के दौरान पुलिस वालों ने रुककर चाय पी जबकि घायल रकबर पुलिस की गाड़ी में इलाज के लिए तड़प रहा था.

शुक्रवार को अलवर पुलिस द्वारा निचली अदालत में दाखिल चार्जशीट में जिन चार लोगों को आरोपी माना गया है उनके नाम हैं, परमजीत सरदार ,धर्मेंद्र यादव, नरेश कुमार और विजय. गोरक्षा समिति से जुड़े नवल किशोर शर्मा भी पुलिस की जांच के दायरे में हैं. 25 पन्नों की चार्जशीट में किसी भी पुलिस वाले को आरोपी नहीं बनाया गया है. कोर्ट ने चार्जशीट में फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट संलग्न नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की. इसके जवाब में पुलिस ने कहा कि महीने भर के भीतर वह सभी जांच रिपोर्ट व अन्य सबूतों के साथ दोबारा चार्जशीट दाखिल करेंगे.

बताते चलें कि इसी साल 21 जुलाई की रात को गो तस्करी के आरोप में रकबर खान की बुरी तरह पिटाई की गई थी. अस्पताल में रकबर की मौत हो गई थी. राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने माना था कि रकबर की मौत पुलिस हिरासत में हुई थी. पुलिस अफसरों की बनाई गई उच्चस्तरीय जांच कमेटी ने भी स्वीकार किया था कि रकबर की मौत पुलिस लापरवाही की वजह से हुई थी. राज्य सरकार ने इस केस में न्यायिक जांच के आदेश दिए थे. जांच के दौरान एक एएसआई को निलंबित और तीन सिपाहियों को लाइन हाजिर किया गया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी साफ हुआ था कि चोट लगने से रकबर की मौत हुई है.

अलवर मॉब लिंचिंग पर राजस्थान सरकार ने मानी पुलिस की चूक- पुलिस हिरासत में रकबर की मौत

 

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