पटना: सृजन घोटाले में गिरफ्तार आरोपियों में से एक नाजिर महेश मंडल की मौत के बाद राज्य के डीजीपी पीके ठाकुर ने प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी दी है. डीजीपी ने महेश मंडल की मौत पर मीडिया को बताया कि कि उनकी गिरफ्तारी 14 तारीख को हुई , उनको पहले से मधुमेह और किडनी संबंधित बीमरी थी. बता दें कि आज सुबह ही मंडल की मौत भागलपुर के अस्पताल में हुई थी.
 
डीजीपी ने कहा कि महेश मंडल सप्ताह में 3 दिन डायलिसिस कराते थे. गिरफ्तारी के अगले दिन 15 को जेल भेज दिया गया था. उसके बाद लगातार उनका ईलाज चलता भी रहा, शुरू में जेल अस्पताल में, फिर जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में. मंडल को जब जेल भेजा गया था तब उनके ईलाज के कागजात भी साथ में लगाए गए थे.
 
 
इनका इलाज हिंदुजा हॉस्पिटल मुंबई, बीएम बिरला हार्ट रिसर्च सेंटर कोलकत्ता और क्रिस्चन मेडिकल कालेज भेलोर में हुआ था. दो साल से अपना इलाज करा रहे थे. मौत की घटना के दिन भी उन्हें ईलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन बचाया जा नहीं सका.
 
डीजीपी की माने तो अब तक इस मामले में 11 मामले दर्ज हो चुके हैं, जिसमें अब तक 18 लोगों की गिरफ्तारी भी की गई है. डीजीपी ने बताया कि इस घोटाले में लगभग 870 करोड़ रुपए के गबन का मामला सामने आया है. घोटाले के तह तक जाने के लिए प्रत्येक वित्तिय वर्ष के अनुसार जांच की जा रही है. भागलरपुर में अब तक 9, सहरसा में 1 और 1 बांका में केस दर्ज हो चुके हैं. 
 
 
बता दें कि राज्य सरकार ने सीबीआई से इस घोटाले की जांच की अनुशंसा की है. लेकिन जब तक सीबीआई इस मामले की जांच को अपने हाथ में नहीं लेती है तब तक बिहार पुलिस ही इसकी जांच कर रही है. पीके ठाकुर ने कहा कि मामले में ऐसे कागजात मिले हैं .
 
जिससे पता चलता है कि 2003 से ही संस्था को सरकारी राशि मुहैया हो रही थी. गिरफ्तार की सवाल पर डीजीपी ने कहा कि अभी तक जो गिरफ्तार और फरार अभियुक्त हैं उनके लगभग डेढ़ दर्जन बैंक खातों को फ्रिज कर दिया गया है. ताकि राशि की निकासी न हो सके, और आवश्यकता पड़ने पर राशी की निकासी हो सके.

 

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