चेन्नई. मद्रास हाईकोर्ट ने आरएसएस कहा है कि अगर उन्हें रैलियां निकालनी है तो फुल पैंट पहननी होगी. आरएसएस विजयदशमी के अवसर पर तमिलनाडु में रैलियों को निकालने की तैयारियों में जुटा हुआ है. कोर्ट ने उनको ये आदेश दिया है कि RSS के लोग उन हाफपैंटों को पहनकर जुलूस नहीं निकाल सकते, जिन्हें वे पिछले नौ दशक से पहनते आ रहे हैं.

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अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों की तरह आरएसएस की तमिलनाडु में उतनी प्रभावी उपस्थिति नहीं है. इस साल विजयादशमी के मौके पर आरएसएस ने राज्यभर में 14 जुलूस आयोजित करने का फैसला किया है, जिनमें से प्रत्येक में 200 से 300 कार्यकर्ता शामिल होंगे.

कन्याकुमारी और कोयम्बटूर में उन्हें लगभग 2,000 सदस्यों के आने की उम्मीद है. कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका जताते हुए पुलिस ने इन जुलूसों को अनुमति देने से इंकार कर दिया था. पर कोर्ट ने कहा है कि आरएसएस जुलूस तभी निकाल सकती है जब वे फुल पैंट पहनें.

अधिकारियों का कहना है कि चेन्नई सिटी पुलिस एक्ट के मुताबिक जिन जुलूसों में शिरकत करने वालों की पोशाक सशस्त्र बलों या पुलिस की वर्दी से मिलती-जुलती हो वैसे जुलूसों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है. कई दशकों से आरएसएस के कार्यकर्ताओं की सफेद कमीज़ तथा खाकी हाफपैंट वाली वर्दी राज्य पुलिस की ट्रेनिंग के दौरान पहनी जाने वाली वर्दी से बहुत मिलती-जुलती है.

विपक्ष पर लगाया राजनीति करने का आरोप

आरएसएस ने इस मुद्दे पर राज्य में सत्तारुढ़ AIADMK और प्रमुख विपक्षी पार्टी DMK पर राजनीति करने का आरोप लगाया है. कोर्ट में आरएसएस का पक्ष रखने वाले एन. बाबू मनोहर ने आरोप लगाया, “दोनों द्रविड़ पार्टियां नहीं चाहतीं कि तमिलनाडु की जनता आरएसएस को जान पाए. वो डरी हुई हैं.”

वहीं AIADMK ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि यह पुलिस का निर्णय है, और पार्टी की इसमें कोई भूमिका नहीं है. उधर, DMK ने कहा है कि आरएसएस के वकील ‘अनर्गल’ आरोप लगा रहे है.