नई दिल्ली. दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में इमारतों की छतों पर चल रहे रस्टोरेंट्स और पब बंद हो सकते हैं. नई दिल्ली नगर निगम की छतों को भोजनालय के तौर पर इस्तेमाल करने पर पाबंदी लगाने की योजना है. 
 
इनख़बर से जुड़ें | एंड्रॉएड ऐप्प | फेसबुक | ट्विटर
 
इसकी वजह रेस्टोरेंट और पबों से कनॉट प्लेस की ऐतिहासक इमारतों को खतरा होने और उनके बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त बोझ पड़ने को बताया गया है. टाइम्स आॅफ इंडिया की खबर के मुताबिक नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन ने नगर निगम के पास छतों से पानी रिसने की शिकायत की थी. इस शिकायत पर कोई कार्रवाई न होने पर 15 सितंबर को एसोसिएशन ने नग​र निगम को चिट्ठी लिखकर निराशा जाहिर की थी. 
 
इसी शिकायत के बाद नगर निगम ने फैसला किया है कि कनॉट प्लेस एक ऐतिहासिक इमारतों वाला बाजार है और यहां छतों पर भोजनालय खुलना बंद होना चाहिए. एनडीएमसी अध्यक्ष का कहना है, ‘हमने ट्रेडर्स एसोसिएशन के साथ बैठक की थी और एक कार्य योजना तैयार होने के बाद हम छतों पर रेस्टोरेंट व पब बंद कर देंगे.’
 
कपिल मिश्रा ने किया विरोध
पिछले साल एनडीएमसी ने रेस्टोरेंट का छतों तक विस्तार करने वाले 13 कैफे को बंद किया था. ये कैफे जिन कार्यों के लिए ग्राउंड फ्लोर पर लाइसेंस की जरूरत होती है, उन्हें छत पर करने लगे थे. हालांकि, दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा के हस्तक्षेप के बाद ये सीलिंग अभियान रोक दिया गया.
 
कपिल मिश्रा इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि ये रेस्टोरेंट​ शहर को आकर्षक बनाते हैं और उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए. जहां तक इमारतों को नुकसान होने की बात है, तो एनडीएमसी को इमारतों पर सीमित भार रखने संबं​धी कुछ नए उपायों पर विचार करना चाहिए. 
 
रेस्टोरेंट और पबों का मानना है कि अगर ऐसा किया जाता है, तो यह स्मार्ट सिटी बनाने के विचार के​ विपरीत होगा. वहीं, ट्रेडर एसोसिएशन की दलील है कि जहां पहले कुछ रेस्टोरेंट्स थे वहां आज इनकी बढ़ती संख्या ने भीड़भाड़ बढ़ा दी है. रेस्टोरेंट के साथ कोई विवाद नहीं है लेकिन इमारतों के ढांचे को ध्यान में रखे बिना उन पर बोझ बढ़ाया जाता है. सीवर जाम हो जाता है और हर तरफ गंदगी फैल जाती है.