रांची. राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में महिला मरीज को जमीन पर खाना परोसने के आरोपी अनुबंध कर्मचारी को निदेशक के आदेश पर बरखास्त कर दिया गया है. बरखास्त कर्मचारी रिटायर्ड होने के बाद रिम्स के किचेन में अनुबंध पर काम कर रहा था. मामले की जानकारी होने के बाद रिम्स प्रबंधन ने उपाधीक्षक डॉ वसुधंरा के नेतृत्व में शुक्रवार को जांच करायी, जिसमें कर्मचारी दोषी पाया गया. इधर, मुख्यमंत्री के आदेश पर शुक्रवार को तीन सदस्यीय जांच टीम भी रिम्स पहुंची.
 
इनख़बर से जुड़ें | एंड्रॉएड ऐप्प | फेसबुक | ट्विटर
 
वहीं झारखंड हाइकोर्ट ने भी रिम्स में बेसहारा महिला मरीज को फर्श पर खाना देने के मामले को गंभीरता से लिया है. शुक्रवार को चीफ जस्टिस वीरेंदर सिंह व जस्टिस एस चंद्रशेखर की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया. इस मामले में मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव, रिम्स के निदेशक को प्रतिवादी बनाते हुए नोटिस जारी किया गया. खंडपीठ ने पूछा है कि रिम्स में मरीजों के लिए क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध है, उसका कैसे प्रबंधन किया जाता है. इस मामले में क्या कार्रवाई की गयी है, उसकी विस्तृत जानकारी भी दी जाये. मामले की सुनवाई के लिए 28 सितंबर की तिथि निर्धारित की. 
 
बता दें कि राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के ऑर्थो वार्ड में 22 सितंबर को दोपहर में बेसहारा महिला मरीज को किचनकर्मियों ने जमीन पर ही खाना परोस दिया था. महिला का आरोप है कि जब महिला ने किचन स्टाफ से खाना मांगा तो पहले उसे फटकारा. फिर उससे फर्श साफ कराया और वहीं, दाल-चावल और सब्जी परोस कर चले गए.