नई दिल्ली. आज पूरे देश में भगवान नारायण को समर्पित अनंत चतुर्दशी का पर्व धूम-धाम से मनाया जा रहा है. आज भाद्पद की चतुर्दशी है जिसे अनंत चतुर्दशी कहा जाता है. अनंत चतुर्दशी में अनंत सूत्र बांधने की परंपरा है. इसके पीछे मान्यता है कि अनंत सूत्र बांधने से प्राणी की अनंत काल तक भगवान नारायण रक्षा करते हैं.
 
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पौराणिक कथा
अनंत चतुर्दशी के बारे में कहा जाता है कि महाभारत काल में जब पांडव घर से बघर हुए थे उसी समय उन्हें भगवान श्रीकृष्ण ने अनंत चतुर्दशी का व्रत करने को कहा था. उसके बाद पांडवों ने इस व्रत को किया जिससे उनको उनका राज-पाट वापस मिल गया. उसके बाद से ही अनंत चतुर्दशी का व्रत शुरू हुआ. अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है और चौदह गांठो वाले अनंत रक्षा सूत्र बांधे जाते हैं.
 
पूजा मुहूर्त-विधि
अनंत चतुर्दशी भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है. इसके लिए पूजा का मुहूर्त सुबह 06:29 से लेकर शाम 27:15 ( दिल्ली के लिए) बजे तक है. व्रत के बाद ब्राह्मणों को दान देना अनिवार्य है, क्योंकि इसके बिना आपका व्रत अधूरा रह जाएगा. रक्षा सूत्र महिलाओं के बाएं हाथ पर और पुरुषों को दाहिने हाथ में बांधनी चाहिए. नए सूत्र को बांधने के बाद पुराने सूत्र को उतार देना चाहिए.