मुंबई. अक्सर लोग अपना गुनाह छुपाने का हर संभव तरीका अपना लेते हैं लेकिन बॉम्बे हाइकोर्ट में एक ऐसा मामला आया, जिसमें एक युवक ने न सिर्फ गुनाह कबूला बल्कि अपनी डिग्री भी वापस कर दी.
 
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बॉम्बे हाइकोर्ट में आए इस मामले ने सभी को हैरत में डाल दिया है. पांच साल पहले एक युवक ने लीक हुए पेपर को रिश्वत देकर खरीदा था और फिर परीक्षा पास करके इंजीनियर बन गया. लेकिन, उसकी अंतरात्मा ने उसे यह स्वीकार नहीं करने दिया. पांच सालों से अपने अपराधबोध में जलने के बाद अब उसने बॉम्बे हाइकोर्ट की शरण ली. अब वह चाहता है कि उसकी डिग्री वापस ले ली जाए ताकि वह सुकून से जीवन जी सके.
 
बीई डिग्री (बैचलर आॅफ इंजीनियरिंग) धारक 26 साल के वैभव पाटिल ने कोर्ट से अपील की है कि वह विश्वविद्यालय के अधिकारियों को उसकी डिग्री वापस लेने के निर्देश दे ताकि गलत तरीके से मिली डिग्री वापस करने के बाद उसे शांति मिल सके।
 
वैभव पाटिल ने अपनी याचिका में कहा है कि मई, 2011 में उसने मुंबई विश्वविद्यालय से बीई की डिग्री ली थी. लेकिन, इस बात से वह बेचैन था कि बीई के पहले साल में उसने पेपर लीक मामले के दौरान एक पेपर रिश्वत देकर पास किया था। हालांकि, उसके पास रिश्वत देने का कोई सबूत नहीं है पर उसकी अंतरात्मा उसे दिन-रात धिक्कारती है. इस कारण वह न तो कोई नौकरी कर ढूंढ पा रहा है और न ही कोई कारोबार कर रहा है.
 
डिग्री लौटाने के लिए वैभव ने विश्वविद्यालय में भी बात की थी लेकिन अधिकारियों ने उसे मनोचिकित्सक से मिलने की सलाह दे दी. इसके बाद कोई रास्ता ने मिलने पर वैभव ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है.
हाइकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता रूई रॉड्रिग को दो हफ्ते बाद एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है जिसमें यह जानकारी हो कि ऐसे मामलों में विश्वविद्यालय की क्या नीति होती है.