इंफाल. मणिपुर से ऐसी घटना सामने आई है कि जिसे सुनकर आप भी कुछ समय के लिए चौंक जाएंगे. वहां भारतीय संस्कृति का प्रतीक माने जाने वाली साड़ी पर रोक है लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इस खबर को किसी मीडिया रिपोर्ट या किसी चैनल में नहीं दिखाया गया है.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक अखिल भारतीय जनरल सचिव (NSUI) और सामाजिक कार्यकर्ता (जेंडर) Angellica Aribam ने इस खबर को अपने ट्विटर पर शेयर किया है.

 

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि साड़ी पर प्रतिबंध ‘भारतीयकरण’ और औपनिवेशिकरण समय से ही चला आ रहा है कोई नई बात नहीं है. लेकिन इन सब के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि भारतीयों का सबसे पसंदीदा कपड़ा साड़ी को मणिपुर में प्रतिबंध क्यों किया गया. उन्होंने आगे लिखा कि मलेशिया में रहने वाले भारतीयों को भी साड़ी पहने के अधिकार की लड़ाई लड़नी पड़ी थी और वैसे ही स्थिति मणिपुर में मौजूद है.

 

Angellica Aribam ने अपने पोस्ट में आगे लिखते हुए कहा कि साड़ी पर प्रतिबंध लगने की वजह से ‘मैंने गर्व से साड़ी पहनने का निर्णय लिया है.’ बता दें कि 2001 में भी इस तरह के प्रतिबंध लगाए गए थे.  KYKL ( Kangjamba ) नाम का एक संगठन है, जिसके सदस्य ने नोटिस डाल दिया था कि मणिपुर की लड़कियों और महिलाओं को निर्देशित किया जा रहा है कि साड़ी और सलवार पहनने पर बुरा अंजाम भुगतना पड़ सकता है. यहां तक कि पतलून में भी दिख जाए तो गोली मारकर हत्या कर दी जाएगी.
 
यह एक अलग बात है कि इस तालिबानीकरण फरमान का महिलाओं के द्वारा जमकर विरोध किया गया था लेकिन अभी सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या महिलाओं को इस तरह के फरमान की अनदेखी करनी चाहिए ?