भोपाल. स्वराज अभियान के संयोजक योगेंद्र यादव ने मध्य प्रदेश सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए कहा है कि बुंदेलखंड में किसान सूखे की मार झेल रहे हैं और किसानों को राहत देने के बजाय कर्ज वसूली के नोटिस जारी किए जा रहे हैं. 
 
मध्य प्रदेश की राजधानी में सूखा, खेती और आजीविका संघर्ष मोर्चा द्वारा पर्यावरण दिवस पर योगेंद्र ने कहा, “देश के कई जिले सूखे से प्रभावित हैं, किसान आत्महत्या कर रहे हैं, किसान बैंकों और निजी साहूकारों से लिए गए ऋण की भरपाई न करने की स्थिति में खेती छोड़ने को मजबूर हैं. मनरेगा का काम नहीं मिल रहा है.”
 
यादव ने पिछले दिनों तीन अन्य संगठनों के साथ मिलकर मराठवाड़ा व बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त इलाकों की पदयात्रा की थी. इस दौरान उन्होंने सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से अवगत कराया था और उनकी स्थिति को करीब से जाना था. इस मौके पर मध्य प्रदेश आपदा निवारण मंच द्वारा किए गए सर्वे व अध्ययन पर ‘बिन पानी सून’ नामक पुस्तिका का विमोचन किया गया.
 
क्या है पुस्तिका में
पुस्तिका के अनुसार, अध्ययन क्षेत्र 66 ग्रामों से 19000 लोगों ने आजीविका के लिए पलायन किया है, और इनमें से अधिकतर दलित व आदिवासी समाज के लोग हैं, जो मुख्यत: खेतिहर और छोटे व सीमांत किसान हैं. पुस्तिका में राज्य अपराध रिकार्ड ब्यूरो, मध्य प्रदेश के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि पिछले पांच सालों (2010-2015) में 6586 किसानों ने आत्महत्या की है, जिसमें बुदेलखंड के 570 (8.6 प्रतिशत) किसान शामिल हैं.
 
बुदेलखंड में सूखे के चलते किसान अपनी खेती को न केवल छोड़ रहे हैं, बल्कि आजीविका के संकट के चलते पलायन कर रहे हैं. इस मौके पर जनपहल की सारिका सिन्हा ने कहा कि पानी के निजीकरण और औद्योगिकीकरण के चलते परंपरागत जल व्यवस्था नष्ट हो रही है, और गिरते पर्यावरण ने सूखे को जन्म दिया है. 
 
जनसंवाद में खाद्य सुरक्षा, जल संकट और पशु पेयजल संकट, मनरेगा, कृषि ऋण, फसल क्षति और मुआवजा, किसान आत्महत्या, पलायन, बंधुआ मजदूरी, मध्यान्ह भोजन, विकलांगों पर सूखे का प्रभाव, ग्राम सभा और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य आदि मुद्दों पर विभिन्न अंचलों से आए पीड़ितों द्वारा विभिन्न प्रकरण प्रस्तुत किए गए.

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