लखनऊ. उत्तर प्रदेश में एक प्राथमिक शिक्षक संघ ने रविवार को दावा किया कि पंचायत चुनाव के दौरान मतदान ड्यूटी पर तैनात 1,621 शिक्षकों की मौत कोरोना वायरस से हुई है. संघ ने मृतकों की सूची जारी की है. वही परिजनों ने राज्य के सीएम योगी आदित्यनाथ से एक करोड़ का मुआवजा मांगा.

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने मरने वाले कर्मचारियों और शिक्षकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है.
इसने यह भी कहा कि राज्य के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने मतगणना से एक दिन पहले 1 मई को उन्हें आश्वासन दिया था कि अस्वस्थ शिक्षकों और कर्मचारियों को मतदान ड्यूटी पर नहीं रहने के लिए कहा जाएगा. हालांकि, यूनियन ने दावा किया कि मतगणना और मतदान के दिनों में बीमार पड़ने के कारण अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया या वेतन में कटौती का सामना करना पड़ा.

संघ ने मांग की कि सरकार मतदान ड्यूटी पर अनुपस्थित शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ सभी दंडात्मक कार्रवाई वापस ले. इसने यह भी मांग की कि मृतक सहित सभी शिक्षकों को “कोरोना योद्धा” घोषित किया जाए.

29 अप्रैल को, शिक्षक निकाय ने 706 शिक्षकों और शिक्षा मित्रों (पैरा-शिक्षकों) की सूची बनाई थी, जिनकी चुनाव ड्यूटी पर मृत्यु हो गई थी. बाद में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस सूची को ट्वीट किया.

रविवार को, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश चंद्र ने दावा किया कि दिल से संबंधित बीमारियों से पीड़ित कई शिक्षकों और कर्मचारियों की मृत्यु “तनाव” और दिल के दौरे के कारण हुई.

शर्मा ने यह भी कहा कि जिला प्रशासन ने पंचायत चुनावों के दौरान मतगणना केंद्रों पर कोरोनावायरस सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया. उन्होंने कहा, ‘चिंता की बात यह है कि इतनी जान गंवाने के बाद भी जिलों में प्रशासनिक अधिकारी प्राथमिक शिक्षकों को परेशान कर रहे हैं.

संघ प्रमुख ने कहा कि बुनियादी शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति है, लेकिन रायबरेली, उन्नाव, बांदा, लखनऊ, बस्ती और हरदोई जैसे कई जिलों में, उन्हें कोविड -19 नियंत्रण कक्ष में ड्यूटी सौंपी गई है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षकों और शिक्षा मित्रों सहित प्रत्येक मतदान अधिकारी के परिवारों को 30 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की थी. हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 11 मई को सरकार से कहा था कि वह इस राशि को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये करने पर विचार करे.

एक अलग मामले में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माना था कि चुनाव आयोग, उच्च न्यायालय और सरकार कोरोनोवायरस महामारी की दूसरी लहर के बीच विधानसभा चुनाव और उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव कराने के “विनाशकारी परिणामों” की थाह लेने में विफल रहे.

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