चंड़ीगढ़. देश में महिलाओं की स्थिती सुधारने के लिए सरकार द्वारा कई तरह के योजना बनाए जा रहे हैं. पूरे देश में ‘बेटी बचाओ’, ‘बेटी पढ़ाओ’ और ‘सेल्फी विद डॉटर’ जैसे नारों के बीच हरियाणा के जींद जिले में लड़कियों की संख्या तेजी से घटता जा रहा है. प्रदेश में इसे सुधारने के लिए राज्‍य सरकार द्वारा हर साल करोड़ों रुपए खर्च की जाती है, लेकिन इसके बावजूद जींद के दस गांव आज भी ऐसे हैं, जहां का लिंगानुपात 500 से भी कम है.
 
रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल जनवरी में हरियाणा के पानीपत शहर से पूरे देश में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान शुरू किया था. इसके बावजूद यहां के हालात में कुछ खास बदलाव नहीं हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक जिले के दरौली खेड़ा में महिलाओं की संख्या सबसे कम है.
 
यहां एक हजार लड़कों पर मात्र 217 लड़कियां हैं. इसी प्रकार सफीदों के सरफाबाद में एक हजार लड़कों पर 231 लड़कियां, राजगढ़ ढोबी गांव में एक हजार लड़कों पर 333 लड़कियां, अंबरसर गांव में 375, संगतपुरा गांव में 381, मांडोखेड़ी गांव में 400, सुलहेड़ा गांव में 400, बहादुरपुर में 406, खेड़ी बुल्ला गांव में 444, राजपुरा गांव में 467 लड़कियां हैं.
 
जिला उपायुक्त विनय सिंह ने कहा कि कुछ गांवों में कम लिंगानुपात का मामला सामने आया है और वहां की एएनएम व एमपीएचडब्ल्यू के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा गया है. साथ ही स्वास्थ्य विभाग को समय-समय पर अल्ट्रासाउंड जांचने के आदेश दिए गए हैं ताकि लिंग जांच न हो सके.
 
बता दें कि प्रधानमंत्री ने कन्याओं को बढ़ावा देने के लिए बीते साल जनवरी में हरियाणा के पानीपत शहर से देशव्यापी अभियान बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान शुरू किया था. हरियाणा से अभियान की शुरुआत इसलिए की गई थी, क्योंकि लिंगानुपात के मामले में यह राज्य सबसे बुरी स्थिति में है. उस वक्‍त यहां 1,000 पुरुषों पर 879 महिलाएं थीं. बाल लिंग अनुपात के मामले में हरियाणा देश के अन्य राज्यों में सबसे पीछे है. भारत में लिंग अनुपात के मामले में सर्वाधिक पिछड़े 100 जिलों में हरियाणा के ही 12 जिले शुमार है.

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