रांची. रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने शनिवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर देश का सबसे ऊंचा और विश्व का सबसे बड़ा तिरंगा फहराया गया. पर्रिकर शनिवार सुबह यहां पहुंचे और उन्होंने झारखंड के राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री रघुबर दास की उपस्थिति में रिमोट कंट्रोल के जरिए पहाड़ी मंदिर पर 99 गुणा 66 फुट आकार का विशाल झंडा फहराया.
 
झंडे को यहां मोरादाबादी मैदान में रविवार को आम जनता के लिए प्रदर्शित किया गया. इस विशाल झंडे को फहराने पर कुल 1.25 करोड़ रुपये की लागत आई है, जिसमें तिरंगे के लिए 44 लाख रुपये खर्च हुए. मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों ने कहा कि इसी पहाड़ी पर आज जहां मंदिर स्थित है, वहां ब्रिटिश राज में कई स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गई थी.
 
पहाड़ी मंदिर एक नजर में
भगवान शिव का यह प्राचीन मंदिर धार्मिक आस्था के साथ देशभक्तों के बलिदान के लिए भी जाना जाता है. यह मंदिर देश का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां 15 अगस्त और 26 जनवरी को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा से फहराया जाता है. यहां यह परम्परा 1947 से ही चली आ रही है.
 
बंद रहे थोक प्रतिष्ठान
शनिवार को पंडरा के थोक व्यापारियों  ने अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखने की घोषणा की. नेताजी जयंती की वजह से शहर के ज्यादातर स्कूलें भी बंद हैं.
 
टूटे गया फरीदाबाद का रिकॉर्ड
फिलहाल देश में सबसे ऊंचा तिरंगा लहराने का गौरव फरीदाबाद को हासिल था. फरीदाबाद में 246 फीट के पोल पर तिरंगा लहराता है. रांची पहाड़ी पर 24 घंटे तिरंगा लहरायेगा. रात में भी तिरंगा दिखे, इसके लिए पोल के पास सोडियम वेपर लाइट लगायी गयी है. इसकी जमीन से ऊंचाी 493 फीट है. 

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