नई दिल्ली. हिंदी के वरिष्ठ कवि अष्टभुजा शुक्ल को साल 2015 का श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान दिया गया है. ‘पद-कुपद’, ‘चैत के बादल’, दुःस्वप्न भी आते हैं’, ‘इसी हवा में अपनी भी दो चार सांस हैं’ आदि अष्टभुजा शुक्ल के प्रमुख काव्य-संग्रह हैं. 
 
इफको ने पुरस्कार चयन के लिए वरिष्ठ साहित्यकारों का पैनल गठित किया था. इस पैनल में अध्यक्ष गिरिराज किशोर के अलावा अजित कुमार, मुरली मनोहर प्रसाद सिंह और डॉ. दिनेश कुमार शुक्ल शामिल थे.
 
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के रहने वाले साहित्यकार अष्टभुजा शुक्ल बस्ती के ही संस्कृत कॉलेज चित्राखोर, बनकटी में शिक्षक हैं. 31 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में बतौर पुरस्कार शुक्ल को प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र और 11 लाख रुपए का चेक दिया जाएगा. 
 
ग्रामीण और कृषि जीवन पर साहित्य रचना करने वालों को मिलता है ये सम्मान
 
देश की अग्रणी सहकारी संस्था इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड हर साल श्रीलाल शुक्ल स्मृति IFFCO साहित्य सम्मान देती है. अब तक विद्यासागर नौटियाल, शेखर जोशी, संजीव और मिथिलेश्वर को यह सम्मान मिल चुका है.  
 
इफको के एमडी डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कहा “यह पुरस्कार हर साल किसी ऐसे रचनाकार को दिया जाता है जिसकी रचनाओं में ग्रामीण और कृषि जीवन से जुड़ी समस्याओं, आकांक्षाओं और संघर्षों को मुखरित किया गया हो.” डॉ अवस्थी ने कहा कि इफको देश के कला, साहित्य और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के प्रति सजग है.