आस्ताना : कहां तो भारत को वर्ल्ड रेसलिंग चैम्पियनशिप 2019 में 44 वर्षों में (1961 से 2005) दो पदक हासिल होते थे और कहां भारत ने पिछले 13 वर्षों में 14 पदक हासिल हो गये. पहले विनेश ने जो पदक की राह दिखाई थी, उसी क़ामयाबी को बजरंग पूनिया और रवि आगे बढ़ाने में कामयाब हो गये. भारतीय पहलवानों के लिए यहां के बेरिस एरिना में तालियां थमने का नाम नहीं ले रही थीं. भारतीय पहलवानों ने साबित कर दिया कि उन्होंने महज़ टोक्यो ओलिम्पिक के लिए ही टिकट नहीं कटाया है बल्कि उन खेलों के लिए उनकी तैयारी सही दिशा में चल रही है, इसका भी अहसास करा दिया है.

बजरंग बने इतिहास-पुरुष

दिन का पहला पदक 65 किलो में बजरंग पूनिया के नाम रहा जिन्होंने मंगोलिया के तुलगा तुमुर ओचिर से 0-6 से पिछड़ने के बावजूद 8-7 से जीत हासिल की. पिछली वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भी उन्होंने इसी पहलवान को हराया था. पहले राउंड में चार अंक की तकनीक खाने के बावजूद बजरंग ने हिम्मत नहीं हारी और हाफ टाइम तक 2-6 से पिछडडने के बाद उनकी चुस्ती फुर्ती देखते ही बनती थी. वहीं मंगोलियाई पहलवान बुरी तरह से थक चुके थे. इस तरह बजरंग ने वर्ल्ड चैम्पियनशिप में कुल तीसरे पदक के साथ इतिहास रच दिया है. उन्होंने 2013 में ब्रॉन्ज़ और 2018 में सिल्वर और इस बार ब्रॉन्ज़ मेडल जीते. अन्य किसी भी भारतीय पहलवान ने आज तक वर्ल्ड चैम्पिनशिप में एक से अधिक पदक नहीं जीता है.

नई सनसनी हैं रवि

57 किलो में रवि ने ईरान के रेज़ा अतरे को 3-0 से शिकस्त देकर साबित कर दिया कि विपक्षी के बड़े खिताब उनके लिए कोई मायने नहीं रखते. इस चैम्पियनशिप में वह एक बड़ी खोज साबित हुए हैं. उन्होंने यहां यूरोपीय चैम्पियन को हराया. पूर्व वर्ल्ड चैम्पियन को हराया और अब मौजूदा एशियाई चैम्पियन को हराकर सनसनी फैला दी. इससे पहले दोहरे ओलिम्पिक मेडलिस्ट सुशील कुमार को अज़रबेजान के उन खाद्जीमुराद ने 11-9 से शिकस्त दी जो उनसे उम्र में 17 साल छोटे थे. यानी जब सुशील दूसरी बार वर्ल्ड कैडेट चैम्पियन बने थे, तब उनका जन्म हुआ था. हालांकि सुशील ने एक मौके पर मेदवेद ग्रुप के साथ धोबी दांव लगाकर चार अंक अंक बटोरे और एक अन्य मौके पर उन्होंने स्टैंडिंग पोज़ीशन में खेमे सांतो लगाकर अपने पुराने दिनों की याद ताज़ा करा दी युवा जोश के सामने उनका दमखम जवाब दे गया और वह तमाम प्रयासों के बावजूद इस मुक़ाबले में अपनी हार को बचा नहीं पाये. सुशील के अलावा करण (70 किलो), प्रवीण (92 किलो) और सुमित (125 किलो) भी अपने मुक़ाबले हारकर बाहर हो गये.

अज़रेबजानी खिलाड़ी का कमाल

सुशील को हराने वाले खाद्जीमुराद ने अगले राउंड में रियो ओलिम्पिक के ब्रॉन्ज़ मेडलिस्ट तुर्की के सोनर को और उससे अगले राउंड में एशियाई खेलों के दो बार के चैम्पियन और पीडब्ल्यूएल-3 के स्टार उज्बेकिस्तान के बेकजोद को हराकर सबका दिल जीत लिया.

बाकी पहलवान हारे

करण को पीडब्ल्यूएल-1 के पहलवान उज्बेकिस्तान के नवरूज़ोव इख्तियोर ने 7-0 से हराया जबकि सुपर हैवीवेट वर्ग में अर्जुन पुरस्कार विजेता सुमित को हंगरी के डेनियल लिगेती ने 2-0 से हराया. उभरते पहलवान प्रवीण ने 92 किलो में कोरियाई पहलवान को तकनीकी दक्षता से पराजित किया वहीं अगले राउंड में वह यूक्रेन के पहलवान के हाथों 0-8 से मकाबला हार गये.

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