नई दिल्ली: वो 15 दिसम्बर का दिन था, सन था 1933. इंगलैंड की टीम भारत दौरे पर आई थी. भारतीय टीम के साथ उसको दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी थी. ऐसे में पहला मैच खेला गया मुंबई के जिमखाना मैदान मॆं, इससे पहले किसी भारतीय को (नौकरों के सिवा) जिमखाना की कोई भी सुविधा इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं थी. ये पहली बार था कि भारतीय क्रिकेट टीम को ये मौका मिला, सीके नायडू की अगुवाई वाली टीम के नाम ये अलग तरह का इतिहास दर्ज है. हालांकि इस मैच में भारतीय टीम हार गई लेकिन लाला अमरनाथ के शानदार शतक और कई शहरों से आए दर्शकों ने मैच का मजा दोगुना कर दिया था. हर कोई इस मैच को किसी भी कीमत पर देखना चाहता था, वजह भी थी इंगलैंड का देश पर कब्जा था, देश में सविनय अवज्ञा आंदोलन चल रहा था. ऐसे में जंग के मैदान में ना सही खेल के मैदान में ही सही, आमने सामने की भिडंत तो होने जा रही रही थी. आम मैच के मुकाबले इस मैच की टिकटें पांच गुना महंगी रखी गई थीं. स्टेडियम जैसी बैठने के व्यवस्था तो थी नहीं, तम्बू, शामियाने, सोफे रख दिए गए थे. फिर भीड़ पचास हजार पार कर गई थी. लाला अमरनाथ ने जैसे ही दूसरी पारी में सेचुरी पूरी की थी, रात में अगले दिन का मैच देखने के लिए सैकड़ों लोग पुणे से आ गए थे.

भारत को पहली पारी में बैटिंग करने का मौका मिला था, लेकिन भारत की टीम 219 रन बनाकर ही ढेर हो गई. हालांकि जानकार ये भी बताते हैं कि उसके पीछे चार-चार बड़े बल्लेबाजों का एलबीडब्ल्यू आउट होना था. या तो ठीक से उनको इस नियम की जानकारी नहीं थी, या खेल में कुछ गड़बड़ हुई हो सकती है. जो भी बल्लेबाज जमता था, एलबीडब्ल्यू आउट करार दे दिया जाता था, एस वजीर 36 रन बनाकर, लाला अमरनाथ 38 रन बनाकर, कैप्टन सीके नायडू 28 रन बनाकर और विजय मर्चेट को 23 रन बनाकर एलबीडब्ल्यू आउट करार दे दिया गया. कोई भी खिलाड़ी हाफ सेंचुरी नहीं बना पाया, लेकिन इंगलैंड की तरफ से बीएच वेलेंटाइन ने 136 रन मारे और जार्डाइन और वाल्टर्स ने हाफ सेंचुरी मारीं और स्कोर हो गया 438, जबकि केवल एक खिलाड़ी ही एलबीडब्ल्यू दिया गया.

दूसरी पारी में भारत के कुछ खिलाड़ी थोड़ा संभल गए खासकर लाला अमरनाथ और सीके नायडू, लाला ने 118 रन की पारी खेली, किसी भारतीय के ये पहला शतक था, इसमें उन्होंने 21 चौके लगाए. तो एक हाथ से घायल नायडू ने 67 रन बनाए. विजय मर्चेंट् ने तीस रन बनाए लेकिन और कोई टिक नहीं पाया. दिलचस्प बात थी कि इस पारी में भी भारत के 3 खिलाड़ी एलबीडब्ल्यू आउट थे. भारतीय टीम केवल 258 रन ही बना पाई, यानी केवल 39 रन ही ज्यादा, जिसे आसानी से इंगलैंड की टीम ने 1 विकेट खोकर पा लिया. लेकिन मैच देखने वाले भारतीय काफी खुश थे, उनको पता था कि उनकी टीम इस खेल में नई है, सो उसे जैसा भी किया, उम्मीद से बेहतर किया था.

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