नई दिल्ली. Sports In Corona Pandemic: खेल जगत वापसी के लिए बेचैन है. खिलाड़ियों की भुजाएं फड़फड़ा रही हैं. मैदान पर दौड़ भाग करने और पसीना बहाने वाले खिलाड़ी दो महीने से अधिक से घरों में कैद हैं. किसी खेल अधिकारी ने कहा है कि जिस तरह घोड़ा दौड़ने के लिए बना है, उसी तरह खिलाड़ी खेलने के लिए बना है. इन दोनों को बहुत समय तक एक जगह बंद करके नहीं रखा जा सकता. साथ ही ये बात भी सभी मान रहे हैं कि करोना इतनी जल्दी जाने वाला तो है नहीं, सो इसके साथ ही जीवन जीना होगा. अब खेल की वापसी के रास्ते खुलने को हैं, जिसकी तैयारी शुरू हो गई है. कोरोना के साए तले खेल कैसे होंगे, इसके नियम कायदे बनाए जा रहे हैं.खिलाड़ियों को कहा जा रहा है कि अब वो पुरानी आदतें छोड़ें। नए नियमों में अभ्यास करें। पर क्या पुरानी आदतें छोड़ना इतना आसान है. 

फुटबाल में गोल होगा तो खिलाड़ी एक दूसरे से छाती टकराएंगे ही. एक दूसरे के कंधों पर चढ़ने की आदत से बाज आ पाएंगे क्या. क्रिकेट में विकेट मिलने पर खिलाड़ी झूम उठेंगे तो भी कैसे दूर दूर रह पाएंगे. गेंदबाज विकेट मिलने पर कैच लेने वाले खिलाड़ी को गले नहीं लगाएगा. थूक लगा लगा कर गेंद चमकाना और फिर गेंदबाज को देना, क्रिकेटरों की आदत में शुमार है. जब से क्रिकेट खेलना शुरू किया है, तब से यही करते आ रहे हैं. अचानक इसे आईसीसी ने बैन कर दिया पर फितरत का क्या करेंगे. उस पर तुर्रा ये कि हर बार गेंद को सेनेटाइज करो  और सबसे बड़ी बात, जिन दर्शकों से हौसला मिलता था, स्फूर्ति मिलती थी, वो भी मैदान पर नहीं होंगे. ऐसे कैसे खेल होंगे. खैर, वेस्टइंडीज में क्रिकेट का सबसे छोटा फार्मेट टी10 लीग शुरू हो चुकी है. इसमें डिस्टेंस, सेनेटाइजेशन, नो सेलीवा, नो स्पैक्टेटर्स आदि के नियम अपनाए जा रहे हैं. 

आज खेल कोई खेल नहीं रह गया है. दुनिया में ये एक समानांतर अर्थव्यवस्था का रूप ले चुका है. लाखों करोड़ों लोग खेलों से जुड़े हैं और लाखों करोड़ों के कारोबार इससे बावस्ता हैं. आज जब धनवानों की गिनती होती है, तो उसमें अनेक खिलाड़ी टॉप टेबल में मिलते हैं. मार्च में शुरू होने वाला आईपीएल मई समाप्त होने तक भी आयोजित नहीं हो पाया है, पर रद्द नहीं किया जा रहा है. कोई बता रहा है 3000 करोड़ का सौदा है तो कोई बता रहा है 4000 करोड़ की बात है. क्रिकेट जगत इस लीग के रद्द होने पर बड़े घाटे में आ जाएगा. इसलिए सबकी मंशा है कि किसी तरह इसे करा लिया जाए. साथ ही कंगाली को ओर बढ़ रहे क्रिकेट बोर्ड भी सीरीज शुरू कराने को आमादा हैं. मोटी मोटी तनख्वा पाने वाले खिलाड़ियों पर कट लगाए जाने को हैं.

क्रिकेट, टेनिस, फुटबाल, बैडमिंटन, स्क्वैश, टेबल टेनिस, तैराकी, निशानेबाजी, एथलेटिक्स, बास्केटबॉल, रग्बी, हॉकी, आइस हॉकी, मुक्केबाजी आदि तमाम खेल हैं, जो एक अदृश्य वायरस ने रोके हुए हैं. इन्हें फिर से शुरू करना है,  पर कैसे करना है, किसी को सूझ नहीं रहा.  कुश्ती और मुक्केबाजी जैसे कांटेक्ट खेल तो औरभी मुश्किल हैं.  तमाम खेल संगठन खेल नहीं हो पाने के कारण कंगाली की स्थिति को जाने वाले हैं. क्रिकेट बोर्ड तो यहां तक राजी हो गए हैं कि उनके खिलाड़ी दूसरे देश में जाकर 14 दिन के लिए क्वारैंटाइन में रहेंगे और फिर कोराना की विधिवत जांच होने के बाद दर्शक विहीन मैदान में उतरेंगे. टीमें यहां तक तैयार हैं कि मैदानों पर या उनके बेहद पास बने होटलों में ही बनी रहेंगी. दुनिया के कुछ क्रिकेट स्टेडियमों में ही पंचतारा होटल बने हुए हैं. ऐसे स्टेडियमों में तो मैच और भी आसान हो सकते हैं. लेकिन खिलाड़ी नए नियमों को लेकर परेशान हैं. ये सवाल पूछा जा रहा है कि जब मैदान में उतरने वाले सभी को क्वारैंटाइन करने के बाद पूरी जांच परख के बाद उतारा जाएगा तो ये बार बार सैनेटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग का क्या मतलब रह जाता है, और एक ओवर में छह बार गेंद को सेनेटाइज करना तो और भी मुश्किल काम है. ऐसे में खेल क्या होगा, तमाशा ही रह जाएगा.

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