गुवाहाटीः अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास बनाने वाली हिमा दास सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं बल्कि एक जागरूक नागरिक भी हैं. 400 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीतने वाली हिमा दास एक जागरूक नागरिक हैं और उन्होंने अपने गांव में शराब के दुकान को बंद कराने का काम किया है. असम के नागांव जिले के ढिंग गांव में रहने वाली हिमा दास ने गांव और आस-पास के शराब के दुकानों को बंद कराने का काम किया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार हिमा दास की एक पड़ोसी ने बताया कि हिमा ना सिर्फ खेलों में रूचि रखती हैं बल्कि सामाजिक रूप से भी बहुत जागरूक हैं. वह हमेशा लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में ध्यान दिलाती रहती हैं. हिमा दास की पड़ोसी ने कहा कि हिमा ने खुद के गांव और आस-पास के गांवों में शराब के दुकानों को बंद कराने में आगे रहकर अपनी भूमिका निभाई थी.

आपको बता दें हिमा असम के एक छोटे से जिले नागांव की रहने वाली हैं और पहले वह गांव के धान के खेतों में लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थी. बाद में एक स्थानीय कोच का उन पर ध्यान पड़ा और उन्होंने हिमा को एथलेटिक्स में आने की सलाह दी. इसके लिए उन्होंने हिमा के घर वालों को भी मनाया. हिमा शुरूआत में 100 और 200 मीटर की दौड़ में भाग लिया करती थी. लेकिन बाद में अपने कोच के सलाह पर 400 मीटर में भाग लेना शुरू कर दिया. उसके बाद जो हुआ वह इतिहास है.

धान के खेतों में फुटबॉल से विश्व चैंपियनशिप तक का सफर, IAAF वर्ल्ड अंडर-20 गोल्ड मेडल विजेता हिमा दास की कहानी

VIDEO: IAAF वर्ल्ड अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हिमा दास ने रचा इतिहास, गोल्ड मेडल जीतने वालीं पहली भारतीय महिला

देश और दुनिया की ताजातरीन खबरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक,गूगल प्लस, ट्विटर पर और डाउनलोड करें Inkhabar Android Hindi News App