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Rajat Patidar Success Story: जो महज इंजरी रिप्लेसमेंट बनकर आया, उसने कैसे बदल दी RCB की किस्मत?

RCB Captain Success Story: कभी नीलामी में कोई खरीदार नहीं मिला और आज वो RCB को लगातार दूसरा खिताब दिलाने की कगार पर है. जानिए रजत पाटीदार के इस हैरान कर देने वाले सफर का सच.

By: Shivani Singh | Last Updated: May 31, 2026 9:09:49 PM IST



IPL 2026 Final RCB vs GT, Rajat Patidar Success Story: करीब दो दशकों तक रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) एक ऐसा बोझ ढोती रही, जिससे पीछा छुड़ाना नामुमकिन सा लग रहा था. हर सीजन की शुरुआत एक नई उम्मीद के साथ होती और अंत उसी पुरानी निराशा के साथ. ‘ई साला कप नम्दे’ (इस साल कप हमारा है) सिर्फ एक नारा बनकर रह गया था, जो फैंस को बार-बार यह याद दिलाता कि आईपीएल की ट्रॉफी आरसीबी के लिए कितनी दूर की कौड़ी है. फिर एंट्री होती है एक ऐसे कप्तान की, जिसकी उम्मीद शायद किसी ने नहीं की थी.

चकाचौंध से दूर रहने वाले, बेहद शांत और गंभीर स्वभाव के रजत पाटीदार कभी उस पारंपरिक ‘सुपरस्टार’ की परिभाषा में फिट नहीं बैठते थे, जिसके इर्द-गिर्द अमूमन फ्रेंचाइजी टीमें बनती हैं. लेकिन इसी खिलाड़ी की कप्तानी में आखिरकार ‘ई साला कप नम्दू’ (इस साल कप हमारा हुआ) हकीकत में बदल गया. अब, जब आरसीबी अपने खिताब को बचाने से सिर्फ एक जीत दूर खड़ी है, रजत पाटीदार इतिहास रचने की कगार पर हैं. वह आईपीएल के इतिहास में एमएस धोनी और रोहित शर्मा जैसे दिग्गजों के एलीट क्लब में शामिल होने के बेहद करीब हैं.

एक इंजरी रिप्लेसमेंट से लेकर टीम को चैंपियन बनाने वाले कप्तान तक का रजत पाटीदार का यह सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है.

साल 2026 में एक नया अवतार

ज्यादातर टीमें खिताब जीतने के बाद उस कामयाबी को बरकरार रखने में नाकाम रहती हैं, लेकिन पाटीदार ने सुनिश्चित किया कि आरसीबी का दबदबा बना रहे. अगर आईपीएल 2025 का सीजन सूखा खत्म करने के बारे में था तो आईपीएल 2026 ने यह साबित कर दिया कि वह जीत कोई तुक्का नहीं थी. इस सीजन में पाटीदार की कप्तानी का एक नया और निखरा हुआ रूप देखने को मिला है. मैदान पर उनके फैसले ज्यादा सटीक हुए हैं फील्डिंग के चक्रव्यूह बेहद आक्रामक रहे हैं और गेंदबाजों का इस्तेमाल करने में उन्होंने गजब की सूझबूझ दिखाई है. कप्तानी के साथ-साथ उनके बल्ले ने भी इस साल जमकर तबाही मचाई है.

पाटीदार ने 14 मैचों में 486 रन बनाए हैं, जो उनके आईपीएल करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. इस दौरान उन्होंने 41 गगनचुंबी छक्के जड़े और खुद को मिडिल ऑर्डर के सबसे खतरनाक बल्लेबाजों में शुमार कर लिया. मैदान के बाहर बेहद शांत दिखने वाला यह कप्तान, मैदान के अंदर बीच के ओवरों में विरोधियों के लिए काल बना हुआ है.

इस सीजन का सबसे यादगार पल गुजरात टाइटंस के खिलाफ क्वालिफायर-1 में आया. फाइनल का टिकट दांव पर था और पाटीदार ने अपनी कप्तानी पारी का सबसे ऐतिहासिक खेल दिखाया. उन्होंने महज 33 गेंदों में नाबाद 93 रनों की तूफानी पारी खेल डाली. आरसीबी ने प्लेऑफ इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर खड़ा किया और सीधे फाइनल में जगह बना ली. जो खिलाड़ी कभी नीलामी में अनसोल्ड रह गया था और जिसे बाद में रिप्लेसमेंट के तौर पर बुलाया गया था, वह आज धोनी और रोहित शर्मा की बराबरी करने से सिर्फ एक कदम दूर है.

वो कप्तान जिसने बदली आरसीबी की किस्मत

बैटिंग कोच दिनेश कार्तिक और हेड कोच एंडी फ्लावर के साथ मिलकर पाटीदार ने आरसीबी को एक ‘स्टार-निर्भर’ टीम से बदलकर टूर्नामेंट की सबसे संतुलित और मजबूत टीम में तब्दील कर दिया. बल्लेबाजी में गहराई आई, गेंदबाजी को एक सटीक दिशा मिली और ड्रेसिंग रूम का माहौल ऐसा हो गया कि टीम किसी एक बड़े नाम के भरोसे बैठना भूल गई. आज पीछे मुड़कर देखने पर यह फैसला जितना आसान लगता है, तब उतना था नहीं.

आईपीएल 2025 से ठीक पहले आरसीबी के सामने लीडरशिप का एक बड़ा संकट था. फाफ डु प्लेसिस का सफर खत्म हो चुका था और विराट कोहली टीम के साथ तो थे, लेकिन उन्होंने कप्तानी की जिम्मेदारी दोबारा लेने से मना कर दिया था. हर किसी को उम्मीद थी कि फ्रेंचाइजी किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय नाम पर दांव लगाएगी.

लेकिन आरसीबी ने किसी ‘सेलिब्रिटी’ के बजाय खिलाड़ी के ‘कैरेक्टर’ पर भरोसा जताया. उन्होंने आईपीएल 2025 की मेगा नीलामी से पहले पाटीदार को 11 करोड़ रुपये में रिटेन किया. पाटीदार ने इससे पहले 2024 में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के फाइनल में मध्य प्रदेश की कप्तानी की थी, जहां उन्हें श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली मुंबई से हार का सामना करना पड़ा था. आरसीबी का यह दांव फ्रेंचाइजी के इतिहास का सबसे मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ.

वो एक पारी, जिसने जिंदगी बदल दी

आरसीबी ने सबसे पहले पाटीदार को आईपीएल 2021 के मिनी-ऑक्शन में सिर्फ 20 लाख रुपये के बेस प्राइस पर खरीदा था. मध्य प्रदेश के इस टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज की घरेलू क्रिकेट में अच्छी साख थी (आगे चलकर उन्होंने एमपी को 69 साल बाद रणजी ट्रॉफी जिताने में भी मुख्य भूमिका निभाई). हालांकि, आरसीबी के लिए उनका पहला सीजन बेहद निराशाजनक रहा. मिडिल ऑर्डर में उन्हें सिर्फ चार मौके मिले, जिनमें वह केवल 71 रन ही बना सके. नतीजा यह हुआ कि आईपीएल 2022 की मेगा नीलामी से पहले उन्हें रिलीज कर दिया गया और नीलामी में उन्हें किसी ने नहीं खरीदा.

इस झटके से निराश होकर पाटीदार ने आईपीएल के सपने को पीछे छोड़ दिया और मई 2022 में अपनी शादी की तारीखें तय कर लीं. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. सीजन के बीच में आरसीबी के विकेटकीपर लवनीथ सिसोदिया चोटिल हो गए और तब हेड कोच माइक हेसन ने पाटीदार को बुलावा भेजा. पाटीदार ने बाद में एक इंटरव्यू में बताया था कि वह शुरुआत में टीम से नहीं जुड़ना चाहते थे क्योंकि उन्हें लगा कि वह पूरे सीजन सिर्फ बेंच पर बैठे रहेंगे. लेकिन परिवार के जिद करने पर वह मान गए. इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास है…

पाटीदार को उस सीजन 8 मैच खेलने का मौका मिला और वह आरसीबी के सबसे सफल अनकैप्ड (जिन्होंने इंटरनेशनल डेब्यू न किया हो) खिलाड़ी बने. उन्होंने 333 रन बनाए, जिसमें लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ एलिमिनेटर मैच में खेली गई 54 गेंदों में 112* रनों की वो जादुई पारी भी शामिल थी. वह आईपीएल प्लेऑफ के इतिहास में शतक बनाने वाले पहले अनकैप्ड खिलाड़ी बने थे.

जब चोट ने उड़ा दी थी नींद

जब ऐसा लग रहा था कि पाटीदार का करियर उड़ान भरने के लिए तैयार है, तभी एक बड़ा झटका लगा. एड़ी की चोट के कारण वह आईपीएल 2023 से पूरी तरह बाहर हो गए. एक पूरा सीजन मिस करना किसी भी खिलाड़ी के लिए मानसिक रूप से तोड़ देने वाला होता है. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। ठीक होने के बाद वह घरेलू क्रिकेट में लौटे और धीरे-धीरे अपनी लय हासिल की. घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें 2023 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे डेब्यू का मौका मिला, जहां उन्होंने बतौर ओपनर 22 रन बनाए. इसके बाद 2024 में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू भी किया और तीन मैचों में 63 रन बनाए.

स्पिन गेंदबाजों के लिए ‘काल’

चोट से उबरकर जब पाटीदार दोबारा आरसीबी की जर्सी में लौटे, तो उन्होंने मिडिल ऑर्डर में खेलते हुए 15 मैचों में 395 रन कूट डाले. इससे भी बड़ी बात यह थी कि उन्होंने दुनिया को दिखा दिया कि वह क्या कर सकते हैं. रजत ने उस सीजन 33 छक्के लगाए और उन्हें लीग के सबसे बेहतरीन ‘स्पिन हेटर्स’ (स्पिन को बेरहमी से पीटने वाले बल्लेबाज) में गिना जाने लगा. उन्होंने 177.33 के स्ट्राइक रेट के साथ सीजन खत्म किया और खुद को एक मुकम्मल मैच-विनर के रूप में स्थापित कर लिया.

यही वजह थी कि जब आरसीबी में कप्तानी के बदलाव का दौर आया, तो पाटीदार सिर्फ एक कमबैक स्टोरी नहीं रह गए थे. वह टूर्नामेंट के सबसे खतरनाक बल्लेबाजों में से एक और टीम के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी बन चुके थे और आज, वह आरसीबी को खिताब दिलाने वाले कप्तान हैं. बड़े-बड़े सुपरस्टार्स से सजी रहने वाली इस फ्रेंचाइजी में, आखिरकार घरेलू क्रिकेट से तपकर निकले एक शांत और अनसुने बल्लेबाज ने वो कर दिखाया जो बड़े-बड़े दिग्गज नहीं कर पाए. वह आरसीबी के सबसे बड़े हीरो बन चुके हैं.

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