राहुल द्रविड़ का नाम क्रिकेट के सबसे ईमानदार खिलाड़ियों में लिया जाता है. अपने पूरे करियर में वह शायद ही कभी किसी विवाद में फंसे हों. लेकिन साल 2004 में ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में भारत और जिम्बाब्वे के बीच खेले गए वीबी सीरीज के एक वनडे मैच के बाद उनके साथ एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने सभी को हैरान कर दिया. इस मैच में द्रविड़ ने पहले बल्ले से शानदार 84 रन बनाए और भारत को 255/6 के स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. इसके बाद भारत ने यह मुकाबला 24 रन से जीत लिया, लेकिन मैच खत्म होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा द्रविड़ पर लगे जुर्माने की हुई.
मैच के दौरान राहुल द्रविड़ गले की तकलीफ की वजह से विक्स की जेली जैसी कफ लॉजेंज (Vicks Cough Lozenge) लगा रहे थे. गेंद चमकाते समय उस लॉजेंज का थोड़ा-सा चिपचिपा हिस्सा उनकी उंगलियों पर लगा रह गया और अनजाने में गेंद के चमकदार हिस्से पर भी लग गया. यह पूरी घटना टीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई. इसके बाद थर्ड अंपायर पीटर पार्कर ने मामला मैच रेफरी क्लाइव लॉयड के सामने रखा. जांच के बाद द्रविड़ पर आईसीसी की कोड ऑफ कंडक्ट की धारा 2.10 के तहत गेंद की स्थिति बदलने (Ball Tampering) के नियम का उल्लंघन करने का आरोप तय किया गया.
जानबूझकर नहीं की थी गलती
राहुल द्रविड़ ने साफ कहा कि उन्होंने गेंद से छेड़छाड़ करने की कोई कोशिश नहीं की थी. उनके मुताबिक गले में दर्द होने की वजह से वह कफ लॉजेंज खा रहे थे और उसका थोड़ा-सा हिस्सा अनजाने में गेंद पर लग गया. उस समय भारतीय टीम के मुख्य कोच जॉन राइट ने भी द्रविड़ का बचाव करते हुए कहा था कि इसमें किसी तरह की धोखाधड़ी या अनुचित फायदा उठाने की मंशा नहीं थी. यह पूरी तरह एक अनजानी गलती थी.
फिर भी नियमों के तहत मिली सजा
हालांकि आईसीसी के नियम साफ थे कि गेंद पर किसी भी तरह का बाहरी पदार्थ लगाना नियमों के खिलाफ है, चाहे वह जानबूझकर लगाया गया हो या गलती से. इसी वजह से मैच रेफरी क्लाइव लॉयड ने राहुल द्रविड़ पर उनकी मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया. दिलचस्प बात यह रही कि उनकी ईमानदारी पर किसी ने सवाल नहीं उठाया. आज भी इस घटना को क्रिकेट इतिहास के सबसे अनोखे विवादों में गिना जाता है, क्योंकि यह जानबूझकर की गई बॉल टेंपरिंग नहीं, बल्कि एक अनजानी तकनीकी गलती का मामला था.