नई दिल्ली. भारत की स्टार शटलर पीवी सिंधू ने वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप का खिताब जीत लिया है. फाइनल में सिंधू ने जापान की ओकुहारा को सीधे सेटों में 21-7, 21-7 के स्कोरलाइन से हराया. पीवी सिंधू वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय हैं. बता दें कि सिंधू ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप, ओलंपिक सहित बैडमिंटन के सभी बड़े खिताब जीतने वाली इकलौती भारतीय शटलर हैं. सिंधू का वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में यह पांचवा मेडल है. इससे पहले वो दो बार कांस्य और दो बार रजत पदक जीत चुकी थीं लेकिन गोल्ड पर निशाना अब जाकर लगा है. 

2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में सिंधू ने कांस्य पदक जीता तो 2018 में सिल्वर मेडल अपने नाम किया. गोल्ड फिर भी दूर रहा.2018 के एशियन गेम्स में भी सिंधू फाइनल तक पहुंची लेकिन गोल्ड जीतने में नाकाम रहीं. वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में भी यह सिंधू का पांचवा मेडल है. इससे पहले वो दो कांस्य पदक और दो बार सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं. इस बार लेकिन सिंधू ने फाइनल के हौव्वे को खत्म कर दिया. सिंधू ने जिस तूफानी अंदाज में जापान की ओकुहारा के खिलाफ खेल दिखाया ऐसा लगा ही नहीं कि यह फाइनल मैच है. और ये वहीं पीवी सिंधू हैं जो फाइनल मुकाबले में नर्वस हो जाया करती थीं. सिंधू ने मैच को एकतरफा बना दिया और पूरे मुकाबले में अपने विरोधी खिलाड़ी को पानी तक नहीं मांगने दिया.

वो ओलंपिक का फाइनल जब पूरे देश का दिल टूटा था…

साल 2016 ओलंपिक में महिला वर्ग के फाइनल में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी कैरोलिना मारिन के खिलाफ भारत की पीवी सिंधू थीं. पूरा देश दुआएं कर रहा था. सिंधू का ओलंपिक पदक पक्का हो चुका था लेकिन सारा देश चाह रहा था कि ये पदक गोल्ड हो. पहला राउंड पीवी सिंधू ने 21-19 से जीता तो सारे देश में खुशियां मनाई जाने लगीं. अगले राउंड में मारिन ने शानदार वापसी की और लगभग एकतरफा तरीके से 21-12 से सेट अपने नाम किया. अब धड़कनें तेज हो चुकी थीं. अंतिम राउंड में सिंधू ने बेहतर खेल दिखाया लेकिन कैरोलिना मारिन के अनुभव के सामने सिंधू के प्रयास नाकाफी साबित हुए.

आखिरी सेट मारिन ने 21-15 से जीता और साथ ही ओलंपिक का गोल्ड मेडल भी भारत के हाथ से फिसल गया. सिंधू ने ओलंपिक का सिल्वर जीता जो कहीं से छोटी उपलब्धि नहीं है लेकिन गोल्ड तो आखिर गोल्ड ही होता है. सिंधू फाइनल नहीं जीत पा रही थीं. वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल में सिंधू ने किसी अगर-मगर की कोई जगह ही नहीं छोड़ी. 21-7,21-7 से जापान की नोजोमी ओकुहारा को हराकर वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियन का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी.

सिंधू का टाइम आ गया…
पीवी सिंधू की यह जीत इसलिए तो खास है कि यह एक ऐतिहासिक जीत है. वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव पीवी सिंधू को मिला है. लेकिन जिस अंदाज में उन्होंने यह मैच जीता है, संकेत साफ हैं कि अब पीवी सिंधू का टाइम आ चुका है. अब हमें ज्यादा आत्मविश्वास से भरी पीवी सिंधू नजर आएंगी. खिलाड़ी तो खैर वो शानदार थी हीं, पुलेला गोपीचंद के कुशल नेतृत्व में उन्होंने बैडमिंटन का ककहरा सीखा है. उनका कद, उनकी ताकत, उनका अटैकिंग स्टाइल उन्हें दुनिया का सबसे खतरनाक खिलाड़ी बनाता है. बस पीवी सिंधू को इसका अहसास होना बाकी था. आज यह अहसास सिंधू ने दुनिया को करा दिया है.

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