नई दिल्लीः अगर आपने हाल ही में खत्म हुए प्रो रेसलिंग लीग सीजन 3 को फॉलो किया होगा तो एक महिला पहलवान ने आपको सबसे ज्यादा आकर्षित किया होगा. शब्दों पे ध्यान रखिएगा मैंने ‘आकर्षित’ कहा है ‘प्रभावित’ नहीं. इस लीग में प्रभावित तो सबसे ज्यादा पूजा ढांडा ने किया, जिनकी कहानी आपको बाद में सुनाएंगे. लेकिन उससे पहले बात मुंबई महारथी टीम की नाइजीरिया मूल की खिलाड़ी ओडुनायो एडुक्यूरोये की.

ओडुनायो की सबसे खास बात ये है कि वह जब भी मैट पर उतरती हैं तो अपने बाउट से पहले और बाद में माइक पर कुछ गाती हैं. किसी को ओडुनायो का यह अंदाज पसंद आता है, किसी को नहीं. किसी-किसी को तो यह कानफोड़ू और कर्कश भी लगता है. दरअसल गलती हमारी भी नहीं है. बॉलीवुड ने हमारे कानों को अरिजीत और जगजीत सिंह के गानों का आदी बना दिया है. बहरहाल ओडुनायो का यह अंदाज किसी को पसंद आए न आए, लेकिन वह आकर्षित जरूर करता है. सभी के मन में यह सवाल जरूर रहता है कि वह आखिर गाती क्या हैं?

गाती हैंगॉस्पेल

ओडुनायो इसका जवाब देते हुए कहती हैं कि दरअसल वह अपने हर बाउट से पहले ईश्वर को धन्यवाद देती हैं और ‘गॉस्पेल’ गाती हैं. गॉस्पेल ईसाई धर्म में ईश्वर वंदना या कहें भजन का एक रूप होता है जो ओडुनायो के देश नाइजीरिया में बहुत प्रसिद्ध है. विश्व चैंपियनशिप 2017 की रजत और 2014 के कॉमनवेल्थ खेलों की स्वर्ण पदक विजेता ओडुनायो कहती हैं कि उन्हें ईश्वर (गॉड) में बहुत श्रद्धा है और जो भी उनको मिला है वह सब ईश्वर का ही देन है. इसके पीछे वह एक कहानी भी बताती हैं. वह कहती हैं कि 2014 का ईस्टर महीना (अप्रैल) चल रहा था और एक रात उनको सपना आया कि वह कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीत गई हैं. अगले कुछ महीनों बाद जून में उनके हाथ में कामनवेल्थ खेलों का स्वर्ण पदक था. इसलिए वह अपने हर बाउट से पहले ईश्वर और अपने प्रशंसकों को धन्यवाद देना नहीं भूलती.

बनना चाहती थी एथलीट

ओडुनायो कहती हैं कि कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतना उनके लिए सपना सच होने जैसा था. वह बताती हैं कि इससे पहले वह एथलेटिक्स में थी और 400 मीटर दौड़ में भाग लेती थीं. ऐथलेटिक्स अन्य अफ्रीकी देशों की तरह नाइजीरिया में भी बहुत लोकप्रिय है और ओडुनायो भी शुरू में इसी खेल के प्रति आकर्षित हुई थी. लेकिन कड़ी प्रतिद्वंदिता के कारण जब उनका चयन राष्ट्रीय टीम में नहीं हुआ तो उन्होंने 17 साल की उम्र में एथलेटिक्स की जगह कुश्ती को चुन लिया. ओडुनायो कहती हैं एथेलेटिक्स छोड़ना उनके लिए एक कठिन निर्णय था लेकिन आज वह अपने फैसले से बहुत खुश हैं.

कॉमनवेल्थ खेलों ने बनाया देश का हीरो

ओडुनायो कहती हैं कि कॉमनवेल्थ में स्वर्ण पदक जीतने के बाद वह अपने देश में एकदम से हीरो बन गई. उन्हें पूरे देश में जाना-पहचाना जाने लगा. हालांकि इसके बाद उन पर अच्छे प्रदर्शन का दबाव भी खासा बढ़ गया. ओडुनायो ने भी इस दबाव को सकारात्मक रूप में लिया और 2015 में हुए विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता. वह ऐसा करने वाली नाइजीरिया की सिर्फ दूसरी पहलवान बनी. इसके बाद 2017 में हुए पेरिस विश्व चैंपियनशिप में ओडुनायो ने अपने पदक का रंग बदलते हुए रजत पदक जीता. उन्होंने इस दौरान किसी विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली नाइजीरियन महिला बनने का इतिहास बनाया.

जीतना चाहती हैं ओलंपिक पदक

ओडुनायो ने 2015 और 2017 के विश्व चैंपियनशिप में तो पदक जीता लेकिन वह 2016 में हुए रियो ओलंपिक में कुछ खास नहीं कर सकीं और उन्हें वहां से खाली हाथ लौटना पड़ा. ओलंपिक में पदक न जीत पाने का ओडुनायो को अब भी मलाल है. इसलिए ओडुनायो अब 2020 टोक्यो ओलंपिक का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं. ओलंपिक का नाम आने पर ओडुनायो की आंखें चमक उठती हैं. वह कहती हैं कि वह ओलंपिक में खेलने के लिए अधीर हैं और मेडल जीतकर अपने देश का नाम विश्व स्तर पर लाना चाहती हैं. गॉड ने चाहा तो वह जरूर कोई न कोई पदक जीतेंगी. बाकी हार-जीत तो खेल में लगी रहती है. ओडुनायो कहती हैं कि उन्हें हार से दुःख तो होता है लेकिन वह इसे अपने आप पर हावी नहीं होने देना चाहती. इसलिए वह अपनी हार के बाद भी गॉस्पेल गाती हैं.

प्रो रेसलिंग लीग– ‘सीखने का एक अड्डा

प्रो रेसलिंग लीग के बारे में ओडुनायो कहती हैं कि यह भरतीय कुश्ती संघ का अनूठा प्रयोग है. इससे ना सिर्फ भारतीय खिलाड़ियों बल्कि उन सभी खिलाड़ियों को फायदा हुआ है जो इसमें भाग लेते हैं. वह कहती हैं कि लीग में सभी देशों से आए हुए खिलाड़ी एक दूसरे से सिर्फ कुश्ती नहीं और भी बहुत कुछ सीखते हैं. वे एक दूसरे के अनुभवों का फायदा उठाते हैं. हमेशा बिंदास मूड में रहने वाली ओडुनायो कहती हैं कि कभी-कभी टीम होटल में हमें बहुत मजा आता है. कई खिलाड़ी ऐसे हैं जो अपनी मातृभाषा ही जानते हैं. इसलिए वे आपस में बात करने के लिए इशारों का सहारा लेते हैं. ओडुनायो कहती हैं कि इसमें उन्हें बहुत मजा आता है. वह इसे अपने ही अंदाज में बयां करती हैं ‘यू नो इट्स समथिंग लाइक क्रेजी’.

सुशील कुमार की हैं फैन

भारतीय कुश्ती के बारे में पूछने पर ओडुनायो कहती हैं कि वह सुशील कुमार की ‘डाई हार्ड फैन’ हैं और उनसे बहुत कुछ सीखती हैं. वह बताती हैं कि जब उन्होंने सुशील कुमार को पहली बार देखा था तो उन्हें ‘गूज बम्प्स’ आ गए थे. बाद में वो उनके पास गई और जब सुशील उनसे सहजता से बात करने लगें तो ही उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास हुआ. वह कहती हैं कि सुशील से उन्हें प्रेरणा मिलती है और उनकी ही तरह ओलंपिक में पदक जीतने की कोशिश करेंगी.

भारत से है एक अलग रिश्ता

भारत के बारे में पूछने पर वह कहती हैं कि वह भरतीय मसालेदार खाने की बहुत शौकीन हैं. हालांकि ट्रेनिंग के कारण वह ऐसे खाने कम ही खाती हैं. सीजन 2 के दौरान वह ताजमहल भी देखने गई थी जो उन्हें बहुत पसंद आया. भारतीय लोगों के बारे में कहती हैं कि वे बहुत सीधे और भोले-भाले होते हैं. ओडुनायो कहती हैं कि उन्हें भारत से प्यार है और इसलिए ही वह बार-बार भारत आना पसंद करती हैं. आपको बता दें कि ओडुनायो उन चंद विदेशी रेसलर्स में से एक हैं जिन्होंने प्रो रेसलिंग लीग के तीनों सीजन में भाग लिया है. वह अभी से ही चौथे सीजन का भी बेसब्री से इंतजार करने लगी हैं. लेकिन ओडुनायो आखिर में एक और चीज जोड़ती हैं ‘आई लव नाइजीरिया मोर’.

 

 

 

 

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