Monday, August 15, 2022

Powerlifter Sudhir: पोलियो ने पांच साल की उम्र में सुधीर को बना दिया था दिव्यांग, इस वजह से शुरू की पावर लिफ्टिंग

नई दिल्ली। इंग्लैंड के बर्मिंघम में 22वे कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन खेला जा रहा है। इस बड़े टूर्नामेंट्स में भारतीय दल के खिलाड़ी बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक इस टूर्नामेंट में कुल 6 गोल्ड मेडल जीते हैं। वहीं देश को छठा गोल्ड भारतीय पैरा-पावरलिफ्टर सुधीर ने दिलाया। इसी के साथ पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत को इन्होंने पहला गोल्ड दिलाया।

इस कारण शुरू की पावर लिफ्टिंग

हरियाणा के सोनीपथ के रहने वाले सुधीर का बचपन कठिनाईयों में गुजरा। इनका जन्म सोनीपथ के लाठ गांव में एक किसान के घर में हुआ था। सुधीर बचपन से ही प्रतिभाशाली रहे हैं। बचपन में पांच साल की उम्र में ये पैर में परेशानी के चलते दिव्यांग हो गए थे। दरअसल सुधीर पोलियो का शिकार हुए थे। हालांकि इसके बावजूद इन्होंने कभी हार नही मानी और साल 2013 में सुधीर ने अपने शरीर को फिट रखने के लिए पॉवरलिफ्टिंग शुरू की। इस खेल में रूचि बढ़ने के कारण इन्होंने लगातार अभ्यास जारी रखा और इसको जीवन का हिस्सा बना लिया।

जीत चुके हैं स्ट्रांगमैन ऑफ इंडिया का खिताब

बता दें कि सुधीर लगातार सात बार के नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं। ऐसे में भारतवासियों को उनसे कॉमनवेल्थ में भी सोना जीतने की ही उम्मीद थी। इन्होंने भारत के लोगों को निराश नहीं किया और गोल्ड जीतकर उनके उम्मीदों पर खरे उतरे। सात बार नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट रहने के साथ ही सुधीर दो बार के स्ट्रांगमैन ऑफ इंडिया का खिताब भी अपने नाम कर चुके हैं।

पैरा-पावरलिफ्टिंग में भारत को दिलाया पहला गोल्ड

87.30 वजनी सुधीर ने अपने पहले प्रयास में 208kg वजन उठाया औप दूसरे प्रयास में रिकॉर्ड 212kg वजन उठाकर देश को छठा गोल्ड और कुल 20वां पदक दिलाया है। इसी के साथ इन्होंने एक और इतिहास रचा है। दरअसल पैरा-पावरलिफ्टिंग (दिव्यांग एथलीट्स की वेटलिफ्टिंग) में भारत ने अपना पहला गोल्ड जीता है। इससे पहले इस कैटेगरी में देश के नाम कोई गोल्ड नहीं था।

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