आगरा :  लगता है कि मौजूदा एशियाई चैम्पियन दिव्या काकरान के दिन कुछ खराब चल रहे हैं। महीने भर में दो बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। पिछले दिनों वह इंटर रेलवे में रितु मलिक से हारी थीं और यहां राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में वह उत्तर प्रदेश की रजनी के हाथों उलटफेर की शिकार हो गईं। इतना ही नहीं, रितु मलिक, साक्षी मलिक जैसी दिग्गजों का हारना और कई जूनियर से सीनियर में आईं खिलाड़ियों का उभरना इस चैम्पियनशिप की सबसे बड़ी विशेषता रही।

प्रतियोगिता के दूसरे दिन पांच में से चार फाइनल मुक़ाबलों का एकतरफा होना यही ज़ाहिर करता है कि कोविड के कारण तकरीबन 11 महीने कुश्ती का आयोजन न होने का असर पहलवानों पर खासा पड़ा है। 53 किलो के फाइनल में महाराष्ट्र की नंदिनी ने दिल्ली की ममता के खिलाफ आठ अंकों की बढ़त के बाद चितपट के आधार पर कुश्ती जीती। 59 किलो का गोल्ड मौजूदा एशियाई चैम्पियन सरिता ने हरियाणा की संजू देवी को तकनीकी दक्षता के आधार पर हराकर जीता। फाइनल में चार बार भारंदाज की तकनीक लगाकर उन्होंने साबित कर दिया कि अब वह डिफेंसिव रेसलर नहीं रहीं। उनकी सभी कुश्तियां एकतरफ रहीं। 65 किलो वर्ग का खिताब रेलवे की निषा ने राजस्थान की मोनिका को तकनीकी दक्षता के आधार पर हराकर अपने नाम किया। निषा के जवाबी हमले और उनका छकाने वाली तकनीकें खासा आकर्षण का केंद्र रहीं। 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने वाली हरियाणा की अनिता ने उत्तर प्रदेश की रजनी को ईरानी दांव पर चित करके 68 किलो वर्ग का गोल्ड जीता। 72 किलो वर्ग में हरियाणा की अनुभवी किरण ने हिमाचल की तेज़ी से उभरती पहलवान रानी को 5-4 से हराकर गोल्ड पर कब्ज़ा किया।     

निराशा, चेहरे पर आक्रोश, अच्छी बढ़त को बरकरार न रख पाना और हताशा में ग़लतियों पर ग़लतियां करना – यहां हम बात कर रहे रियो ओलिम्पिक की मेडलिस्ट साक्षी मलिक की, जिन्हें तीसरी बार जूनियर से सीनियर में आई हरियाणा की ही सोनम ने शिकस्त दे दी। सोनम की साक्षी पर तकरीबन साल भर में यह तीसरी जीत है।

इसे भारतीय कुश्ती के लिए अच्छा संकेत कहा जाएगा क्योंकि जहां कुछ दिन पहले पुरुषों की राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में नरसिंह यादव, अमित धनकड़, जितेंद्र और सरवन का भी कुछ ऐसा ही हश्र हुआ था और वहां कई युवा चैम्पियन सामने आए थे। वहीं इस बार महिलाओं की चैम्पियनशिप में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। यह स्थिति तब है जब साक्षी 4-0 की बढ़त बना चुकी थी लेकिन इसके बाद सोनम का पॉवर गेम और मौके पर सही तकनीक के इस्तेमाल ने सारे समीकरण बदल दिए। पहले एक-एक अंक बटोरकर उन्होंने बढ़त कम की और फिर बगलडूव करके दो अंक बटोरकर दो अंक और बटोर लिए। सोनम इससे भी भला कहां सब्र करने वाली थी। उन्होंने अंटी खींचकर गिराने के साथ दो अंक और बटोरे। खेल थोड़ा रफ था जिससे दोनों को एक-एक कॉशन दिया गया। आखिरकार 7-4 के स्कोर के साथ सोनम एक बड़ा उलटफेर करने में सफल रहीं। इससे पहले 2020 की एशियाई चैम्पियनशिप के दो बार आयोजित ट्रायल में सोनम ने दोनों बार साक्षी को हराकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया था।

पहले दिन पांच में से चार गोल्ड हरियाणा के पहलवानों ने जीते और 72 किलो में पिंकी के रूप में एकमात्र गोल्ड रेलवे के हाथ आया। पिंकी ने हरियाणा की नैना को 7-2 से हराकर हरियाणा के क्लीन स्वीप के सपने को तोड़ दिया। इसके अलावा 57 किलो के फाइनल में हरियाणा की अंशू ने रेलवे के अनुभवी पहलवान ललिता को आसानी के साथ शिकस्त दी। अंशू ने पिछले दिनों वैयक्तिक वर्ल्ड कप में देश को मिलने वाला इकलौता पदक दिलाया था। 55 किलो में हरियाणा की उभरती अंजू को फाइनल में दिल्ली की बंटी के चोटिल होने का फायदा हुआ और वह फाइनल में वॉकओवर के साथ गोल्ड मेडल जीतने में क़ामयाब हो गईं। 50 किलो का गोल्ड हरियाणा की मीनाक्षी ने हरियाणा की ही हन्नी कुमारी को पिछड़ने के बाद हराकर अपने नाम किया। लगता है कि इस वजन पर हरियाणा का कॉपराइट है क्योंकि कभी विनेश और रितु फोगट तो कभी सीमा, निर्मला और अब इस वजन के फाइनल में पहुंचने वाली दोनों महिला पहलवानों का हरियाणा से होना यही ज़ाहिर करता है।  

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