नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास को लेकर कयास-अटकलों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा. तमाम क्रिकेट पंडितों ने दावा किया कि 2019 वनडे वर्ल्डकप के बाद महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे. ऋषभ पंत को चीफ सेलेक्टर एमएसके प्रसाद, हेड कोच रवि शास्त्री और टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली का भी पूरा समर्थन प्राप्त है. वर्ल्डकप के बाद भी महेंद्र सिंह धोनी ने संन्यास की घोषणा नहीं की बल्कि दो महीने के लिए टेरिटोरियल आर्मी में ट्रेनिंग के लिए चले गए. ऐसे में यह सवाल उठाना लाजमी है कि यहीं एमएस धोनी जब खुद कप्तान थे तब सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण, वीरेंद्र सहवाग जैसे खिलाड़ियों को बढ़ती उम्र का हवाला देकर और युवा खिलाड़ियों को मौका देने के नाम पर टीम से बाहर किया था. आज वहीं मापदंड माही अपने पर क्यों नहीं लागू करते?

जब धोनी ने कहा था उन्हें नहीं चाहिए दिग्गज भारतीय खिलाड़ी!

2007 T20 वर्ल्डकप में युवा महेंद्र सिंह धोनी को कप्तानी सौंपने का फैसला सबके लिए हैरानी भरा था. सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण ने अपने आप को इस नए फॉर्मेट से दूर रखा. सचिन ने धोनी को कप्तानी सौंपने की वकालत की. इसके बाद क्या हुआ सारी दुनिया जानती है. भारत ने पहला T20 वर्ल्डकप का खिताब जीता. महेंद्र सिंह धोनी भारत के महान कप्तान बने. लेकिन उन्हीं खिलाड़ियों को भूल गए जिन्होंने उनके शुरुआती दौर में उनकी मदद की थी. एक दौर ऐसा भी आया जब महेंद्र सिंह धोनी ने चयनकर्ताओं से कहा कि उन्हें वनडे टीम में टीम इंडिया के ये फैब फोर नहीं चाहिए. 

नए खिलाड़ियों के गॉ़डफादर सौरव गांगुली को जब नहीं मिला युवा कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का साथ!

सौरव गांगुली ने आधुनिक टीम इंडिया का तेवर और फ्लेवर दोनों तैयार किया. दादा की आक्रामक शैली में भारत ने चढ़कर खेलना शुरू किया. ग्रेग चैपल को टीम इंडिया का कोच बनाने की सिफारिश दादा ने ही की थी. लेकिन बाद में चैपल से उनके संबंध बिगड़े और जल्द ही सौरव गांगुली टीम से बाहर हो गए. इस पड़ाव पर दादा आसानी से संन्यास की घोषणा कर सकते थे लेकिन कोई वजह है जिस कारण सौरव गांगुली को बंगाल टाइगर कहा जाता था. दादा ने दोबारा टीम में वापसी की. धोनी ने उनके अंतिम मैच में जरूर कुछ समय के लिए दादा को कप्तानी सौंपी लेकिन यह एक रस्मअदायगी भर थी, धोनी के प्लान में दादा नहीं थे. 

भारत के सबसे इंपैक्टफुल ओपनर वीरेंद्र सहवाग के साथ धोनी ने क्या किया?

वीरेंद्र सहवाग, धोनी से सीनियर थे. सहवाग की तूफानी बल्लेबाजी से दुनिया का हर गेंदबाज खौफ खाता था. वीरेंद्र सहवाग के खेलने का अपना अंदाज था. सहवाग अगर 15 ओवर पिच पर टिक जाते तो मैच की तस्वीर बदल जाती. सहवाग और धोनी के मनमुटाव की कई खबरें मीडिया में आईं. आखिरकार प्रदर्शन का हवाला देते हुए सहवाग को टीम से बाहर कर दिया गया. इतने बड़े बल्लेबाज के करियर के कुछ बेहतरीन साल मौका न मिलने की वजह से बर्बाद हो गए. सुनील गवास्कर जैसे तकनीकी रूप से परफेक्ट बल्लेबाज भी सहवाग की बैटिंग के दीवाने थे. धोनी ने सहवाग के बाद कई युवाओं को मौका दिया लेकिन वीरेंद्र सहवाग एक ही था जिसे कप्तान धोनी से दुशमनी महंगी पड़ी. 

वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड का संन्यास याद है धोनी?

वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया के सबसे अंडररेटेड खिलाड़ी थे. अहम मौकों पर मैच जिताने के लिहाज से देखा जाए तो लक्ष्मण का नाम टीम इंडिया के सबसे बड़े मैचविनर्स में आएगा अगर टेस्ट मैचों की बात की जाए. राहुल द्रविड का सम्मान उनके विरोधी भी करते थे. इन दोनोें खिलाड़ियों की कोलकाता टेस्ट मैच की साझेदारी भला किसे याद नहीं होगी. न जाने कितने मैचों में इन दोनों महान खिलाड़ियों ने टीम इंडिया की डूबती नौका पार लगाई. लेकिन राहुल द्रविड और लक्ष्मण दोनों ने अचानक संन्यास की घोषणा की. इसके पीछे भी धोनी की लगातार युवा खिलाड़ियों की वकालत करना ही था. अगर उम्र ही पैमाना है और युवा खिलाड़ियों को मौका देना ही कप्तान का फर्ज है तो विराट कोहली को यह तय करना चाहिए कि महेंद्र सिंह धोनी की टीम में वापसी न हो पाए. 

पार्थिव पटेल, दिनेश कार्तिक के बाद क्या संजू सैमसन और ऋषभ पंत का करियर खत्म करना चाहते हैं धोनी?

महेंद्र सिंह धोनी टीम इंडिया में चुने जाने के बाद से लगातार शानदार प्रदर्शन करते रहे. इस दौरान कई अन्य प्रतिभाशाली विकेटकीपर थे जो बेहतरीन बल्लेबाज भी थे लेकिन उन्हें मौका नहीं मिल सका. पार्थिव पटेल गायब हो गए, दीपदास गुप्ता गुम हो गए, दिनेश कार्तिक का पूरा करियर मौकें की तलाश में ही निकल गया. लेकिन वर्ल्डकप में धोनी के होते हुए भी दिनेश कार्तिक और ऋषभ पंत को बतौर बल्लेबाज टीम में जगह दी गई.  महेंद्र सिंह धोनी की वहीं अदाएं जो उनको एक निर्मम मगर शानदार कप्तान बनाती थीं बतौर सीनियर प्लेयर धोनी ने उन तमाम उसूलों से समझौता कर लिया है ऐसा लगता है. 

अपने दोस्त युवराज सिंह के साथ क्या किया धोनी ने?

युवराज सिंह को भारत का  सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी माना जाता था. नेचुरल टैलेंट के दम पर युवराज सिंह दुनिया के किसी भी गेंदबाज की किसी भी गेंद को सीमा पार छक्के के लिए भेज सकते थे. उनकी गेंदबाजी ने भारत को कई मैच जिताए. और फील्डिंग को तो भारत में फैशन ही बनाया था कैफ और युवी की जोड़ी ने. धोनी बतौर कप्तान इतने सफल हुए तो उसके पीछे युवराज सिंह का बड़ा योगदान है. वर्ल्डकप 2011 में युवराज ने अपने दम पर भारत की झोली में विश्वकप डाल दिया. लेकिन इसके बाद जब वो बीमार हुए और दोबारा मेहनत कर टीम में जगह बनाई तो उनके साथ वो सुलूक नहीं हुआ जो एक चैंपियन प्लेयर के साथ होना चाहिए.

अगर युवराज के करियर के आखिरी कुछ साल बर्बाद हुए और क्रिकेट फैंस इस चैंपियन खिलाड़ी को मैदान पर मिस करते रहे तो इसके पीछे कहीं न कहीं युवराज और धोनी के रिश्ते में आई खटास भी थी. युवराज के पिता योगराज सिंह ने धोनी के बारे में काफी उल्टा-सीधा बोला था. हालांकि धोनी ने कभी इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन साइलेंट किलर धोनी के मन में क्या चल रहा था ये जानना तो असंभव ही है. 

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