290
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और पूर्व तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक मनोज तिवारी ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले उनसे पार्टी टिकट के लिए 5 करोड़ रुपये मांगे गए थे, लेकिन उन्होंने यह रकम देने से इनकार कर दिया. चुनाव परिणाम आने के बाद तिवारी ने स्पष्ट कहा कि टीएमसी के साथ उनका साथ अब समाप्त हो चुका है. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने उन्हीं उम्मीदवारों को टिकट दिया जो भारी रकम देने के लिए तैयार थे.
मनोज तिवारी के अनुसार, लगभग 70 से 72 उम्मीदवारों ने पार्टी टिकट पाने के लिए करीब 5-5 करोड़ रुपये का भुगतान किया. उनका दावा है कि उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया, इसलिए उन्हें उम्मीदवारों की लिस्ट से बाहर कर दिया गया. तिवारी ने कहा कि भ्रष्टाचार और विकास कार्यों की कमी पार्टी के खराब प्रदर्शन की मुख्य वजह रही. उन्होंने टीएमसी नेतृत्व की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र की कमी है.
TMC खास लोगों की बात सुनती है
उनके मुताबिक, मंत्रियों की राय को बैठकों में गंभीरता से नहीं सुना जाता था और फैसले कुछ चुनिंदा लोगों द्वारा लिए जाते थे. तिवारी ने अपने विधानसभा क्षेत्र शिवपुर में जल निकासी और सीवेज जैसी बुनियादी समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार की ओर से कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं हुआ. उन्होंने यह भी दावा किया कि जब सरकारी मदद नहीं मिली तो उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए निजी धन खर्च किया.
अरुफ विश्वास पर लगाया आरोप
इसके अलावा, तिवारी ने राज्य के वरिष्ठ मंत्री अरूप विश्वास पर आरोप लगाया कि उन्होंने खेल विभाग में उन्हें हाशिये पर रखा और अपने मंत्री पद की जिम्मेदारियां ठीक से निभाने नहीं दीं. भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए मनोज तिवारी ने कहा कि अब वह क्रिकेट प्रशासन और कोचिंग पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने बीसीसीआई लेवल-2 कोचिंग सर्टिफिकेशन पूरा कर लिया है और बंगाल रणजी टीम के मुख्य कोच पद के लिए आवेदन भी किया है. राजनीति में भविष्य को लेकर उन्होंने कहा कि अन्य दलों से प्रस्ताव मिले हैं, लेकिन अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है.