नई दिल्ली. भारत के कई राज्य 18वें एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों पर ईनाम की बौछार कर रहे हैं. वहीं मध्य प्रदेश में एक पैरालम्पिक खिलाड़ी भीख मांगकर अपना जीवन गुजार रहा है. इस पैरालम्पिक खिलाड़ी ने मध्य प्रदेश सरकार पर वादा खिलाफी का अरोप लगाया है.

पैरालम्पिक एथलीट मनमोहन सिंह लोधी मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव के तहसील के कंदरापुर गांव के रहने वाले हैं. साल 2009 में एक हादसे में मनमोहन का हाथ कट गया था. लेकिन जोश से लबरेज मनमोहन ने हिम्मत नहीं हारी दिव्यांग होने के बावजूद भी उन्होंने कई राजकीय और राष्ट्रीय दौड़ में भाग लिया और पदक जीते.

साल 2017 में मनमोहन सिंह लोधी ने अहमदाबाद में आयोजित प्रतियोगिता में 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ में सिल्वर मेडल हासिल किया था. वर्ष 2017 में ही मध्य प्रदेश सरकार ने मनमोहन लोधी को राज्य का सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग खिलाड़ी घोषि किया था.

सूबे की शिवराज सरकार ने साल 2017 में राष्ट्रीय पदक जीतने वाले राज्य के पैरालम्पिक खिलाड़यों को नौकरी देने का एलान किया और दिव्यांगो के लिए करीब 6000 पदों पर भर्ती करने की घोषणा की. सीएम शिवराज सिंह चौहान की इस घोषणा से मनमोहन लोधी काफी खुश हुए उन्होंने अपनी खेल प्रतिभा के आधार पर सरकारी नौकरी के लिए प्रयास शुरू कर दिया.

लाख कोशिश करने के बावजूद मनमोहन को आज तक नौकरी नसीब नहीं हुई. हर वादों की तरह शिवराज सरकार ये वादा भी भूल गई. नौकरी न मिलने से निराश मनमोहन सिंह लोधी आज दर-दर भीख मांगने के लिए मजबूर हैं.

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