बेंगलुरू. कर्नाटक प्रीमियर लीग (KPL) में भी आईपीएल की तर्ज पर स्पॉट फिक्सिंग की घटना सामने आने के बाद से बवाल मचा हुआ है. सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) के मुताबिक बरेली टस्कर्स और हुबली टाइगर्स की टीम के बीच 31 अगस्त 2019 को हुए मुकाबले में स्पॉट फिक्सिंग की गई थी. सीएम गौतम और अबरार काजी नाम के दो बल्लेबाजों पर आरोप है कि उन्होंने 20 लाख रुपये लेकर धीमी बल्लेबाजी की. इन दोनों खिलाड़ियों को गिरफ्तार कर लिया गया है.

बता दें कि सीएम गौतम आईपीएल में मुंबई इंडियंस की टीम में तीन सीजन खेल चुके हैं. कर्नाटक और गोवा की रणजी टीम में भी रहे हैं. वहीं अबरार काजी भी कर्नाटक रणजी टीम का हिस्सा थे. इस मामले की जांच जारी है.केपीएल फिक्सिंग केस में अब तक तीन खिलाड़ियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

मंगलवार को निशांत सिंह शेखावत को भी सटोरियों से संपर्क में रहने और बेंगलोर ब्लास्टर्स के बॉलिंग कोच वीनू प्रसाद को मैच फिक्सिंग के लिए मनाने की कोशिश का आरोप है. शेखावत को 2018 में हुए केपीएल में बेंगलोर और बेलगावी टीम के बीच खेले गए मुकाबले में 5 लाख रुपये लेकर धीमी बल्लेबाजी करने का आरोप है.जांच के दौरान पुलिस ने टीम बेलगावी पैंथर्स के मामलिक अली, बॉलिंग कोच वीनू प्रसाद और बल्लेबाज विश्वनाथन को भी गिरफ्तार किया था.

इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने दुबई के रहने वाले सटोरिये से संपर्क किया और कई टीमों के खिलाड़ियों को स्पॉट फिक्सिंग के लिए मनाने की कोशिश की. इस मामले की जांच जारी है लेकिन भारतीय क्रिकेट में फिक्सिंग का भूत एक बार फिर मंडराने लगा है. आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग के लिए टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज एस श्रीसंत को सजा का सामना करना पड़ा था. 

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