Karnam Malleswari Exclusive: मुझे उस क्षण का बेसब्री से इंतज़ार है जब भारत को वेटलिफ्टिंग में 20 साल बाद ओलिम्पिक मेडल मिलेगा. वैसे तो पूरा भारतीय दल ओलिम्पिक क्वॉलिफाइंग मुक़ाबलों की तैयारियों में जुटा हुआ है लेकिन मुझे खासतौर पर मीराबाई चानू, राखी हलदर और जेरेमी लालरिनुंगा से खास तौर पर उम्मीदें है. इनकी तैयारियों को देखते हुए मैं इतना ही कह सकती हूं कि ये तीनों न सिर्फ अन्य वेटलिफ्टरों के साथ ओलिम्पिक के लिए क्वॉलीफाई करेंगे बल्कि इनमें ओलिम्पिक मेडल जीतने का भी ज़बर्दस्त जज़्बा है.

कोविड-19 की वजह से ओलिम्पिक के स्थगित होने का भी भारतीय वेटलिफ्टरों को काफी फायदा हुआ है. उन्हें अपनी तैयारी को सही अंजाम तक पहुंचाने का पर्याप्त समय मिल गया है. अगले साल ओलिम्पिक तक अपने प्रदर्शन को हमारे लिफ्टर और ऊंचाई पर पहुंचा सकते हैं.

मीराबाई जीत सकती हैं ओलिम्पिक मेडल

महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में मीराबाई चानू आज दुनिया की बेहतरीन लिफ्टर हैं जो न सिर्फ वर्ल्ड चैम्पियन रह चुकी हैं बल्कि उनकी ओलिम्पिक में पहले तीन में आने की भी खूब तैयारी है. आज चीन की तीन लिफ्टर उनसे बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं. थाईलैंड की जो लिफ्टर उनसे बेहतर कर रही थीं, वो डोपिंग में पकड़ी जा चुकी हैं. परफार्मेंस में 5 से 7 किलो ऊपर-नीचे होना आम बात है इसलिए ओलिम्पिक से पहले टॉप छह या सात लिफ्टरों के मेडल जीतने के काफी अच्छे अवसर रहते हैं. मीराबाई की रैंकिंग भी पांच है. उसके पास अच्छी तकनीक है. स्नैच और क्लीन एंड जर्क में वह लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. इस साल नैशनल चैम्पियनशिप में जिस तरह उन्होंने स्नैच में 88 किलो और क्लीन एंड जर्क में 115 किलो वजन उठाया है. उससे उनसे उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं. उनका ये प्रदर्शन वर्ल्ड चैम्पियनशिप और एशियाई चैम्पियनशिप के प्रदर्शन से भी बेहतर है. मुझे खुशी है कि उनका मौजूदा प्रदर्शन चार साल पुराने रियो ओलिम्पिक के गोल्ड मेडल जीतने वाली थाईलैंड की खिलाड़ी के प्रदर्शन से भी बेहतर है. हालांकि एक सच यह भी है कि रियो में उनके वजन में 48 किलो की महिलाएं ही भाग ले सकती थीं लेकिन अब ये केटेगरी 49 किलो है जिसमें प्रदर्शन में थोड़ा सुधार होना स्वाभाविक है. मुझे विश्वास है कि उन्हें वेटलिफ्टिंग में मेडल जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला होने का गौरव हासिल होगा.

जेरेमी हैं युवा प्रतिभा

जेरेमी लालरिनुंगा भारत के दूसरे ऐसे वेटलिफ्टर हैं जिन्हें भारतीय वेटलिफ्टिंग की नई सनसनी कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा. मैं उनके प्रदर्शन पर नज़र बनाए हुए हूं. अभी वह 17 साल के हैं. यूथ ओलिम्पिक में यूथ वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने भविष्य के लिए उम्मीदें जगा दी हैं. तब उन्होंने 62 किलोग्राम वर्ग में 274 किलो वजन उठाकर देश को इस प्रतियोगिता में पहला गोल्ड मेडल दिलाया. तब से अब तक वह अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार कर रहे हैं. यहां तक कि सीनियर वर्ग में उन्होने एशियाई चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर ये साबित कर दिया कि उनकी तैयारियां सही ट्रैक पर हैं. वह आज 300 के आस पास वजन उठा रहे हैं. स्नैच इवेंट में उनका प्रदर्शन काफी अच्छा है.

उम्मीद है कि क्लीन एंड जर्क में वह अपने प्रदर्शन में सुधार करके पदक के और करीब खिसकेंगे. 67 किलोग्राम वर्ग में वह दुनिया के टॉप 20 खिलाड़ियों में से एक हैं. उनके प्रदर्शन में हो रहे तेज़ी से सुधार की वजह से उनके लिए ओलिम्पिक का एक साल आगे बढ़ना उनके लिए पदक की उम्मीद पैदा कर सकता है. क्योंकि उनकी उम्र कम है इसलिए उनसे आगे भी ओलिम्पिक में भारत के लिए शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है.

राखी हलदर भी कम नहीं

इस कड़ी में तीसरी खिलाड़ी राखी हलदर हैं. हालांकि मैंने उन्हें उतना ज़्यादा करीब से नहीं देखा है लेकिन उनका प्रदर्शन भारतीय महिलाओं में मीराबाई चानू के बाद सर्वश्रेष्ठ है. वह 64 किलो वर्ग में भारत की उम्मीद है.

जल्द खुलेगी मेरी एकेडमी

बाकी महिलाओं के भारी वजनों में भारत की चुनौती आम तौर पर हल्की रहती है और न ही इस खेल की एकेडमियां हैं. इसी बात को ध्यान में रखते हुए जल्दी ही उनकी यमुनानगर में वेटलिफ्टिंग की एकेडमी शुरू हो जाएगी. सेंट्रल गवर्नमेंट के सहयोग से बन रही इस एकेडमी में मैं ग्रासरूट लेवल पर टैलंट को खोजने और उन्हें आगे बढ़ाने का काम करूंगी. आज बैंगलुरु, पटियाला और नॉर्थ ईस्ट में जो बड़े केंद्र हैं, वहां केवल इंडिया कैम्प के खिलाड़ी ही भाग ले सकते हैं लेकिन निचले स्तर पर इस खेल में टैलंट को ऊपर उठाने की दिशा में कुछ नहीं किया गया है. दो एकड़ की जगह पर बन रही इस एकेडमी में हॉस्टल की भी सुविधा होगी और पेशेवर कोच यहां देश भर के टैलंट को चुनने के बाद उन्हें ट्रेनिंग देंगे.

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