आईपीएल युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने का एक आदर्श मंच है जहां युवा खिलाड़ी दुनिया के आला दर्जे के खिलाड़ियों के साथ न सिर्फ ड्रेसिंग रूम शेयर करते हैं बल्कि उनसे बहुत कुछ सीखते हैं। यहां तक कि अपने ज़माने के दिग्गज खिलाड़ी जो आज उनकी टीमों के कोच हैं, वह भी उनकी कला को चमकाने में बड़ा योगदान देते हैं। यहां हम बात कर रहे हैं देवदत्त पड्डिकल की। एक ऐसे खिलाड़ी की जिन्हें रायल चैलेंजर बैंगलौर के कोच साइमन कैटिच और बैटिंग कोच श्रीधरन श्रीराम का चंद कुछ दिनों का साथ मिला और उसमें उन्होंने अपनी कला को अर्श पर पहुंचा दिया।

यहां देवदत्त के पुराने कोचों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता लेकिन आईपीएल के मंच पर पेशेवर रुख और एक काबिल कोच का साथ – ये दोनों बाते साइमन कैटिच और श्रीधरन श्रीराम पूरी करते दिखाई देते हैं। आईपीएल के मंच पर दूसरी अच्छी बात यह है कि कई विदेशी खिलाड़ी खासकर युवा खिलाड़ियों की प्रतिभा को आगे बढ़ाने का मौका देते हैं। यही काम राजस्थान रॉयल्स टीम में पिछले वर्षों में शेन वॉर्न ने किया। सोमवार को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ खेले गए मैच में देवदत्त को आगे बढ़ाने में कप्तान विराट कोहली का भी योगदान रहा और आरोन फिंच का भी।

विराट का इसलिए कि उन्होंने उन्हें अपनी जगह ओपनिंग करने का मौका दिया क्योंकि पिछले वर्षों में विराट कोहली ओपनिंग की कमान सम्भाल रहे थे। वहीं आरोन फिंच का इसलिए कि दूसरे छोर पर उन्होंने देवदत्त की हर शॉट के लिए हौसला आफज़ाई की। यहां तक कि देवदत्त को बेहद आक्रामक रुख अपनाते देख उन्होंने खुद पर संयम बनाए रखा और विकेट के बीच वह उन्हें कुछ अहम टिप्स देते भी दिखाई दिए। यहां तक कि फिंच अपनी पहली बाउंड्री पांचवें ओवर में लगाते दिखाई दिए।

देवदत्त के शुरुआती शॉट्स को देखकर ऐसा लगा कि शॉट्स के लिए उनकी प्रिय जगह मिडविकेट, स्कवेयर लेग और फाइन लेग बाउंड्री है लेकिन नटराजन और भुवनेश्वर पर आकर्षक कवर बाउंड्री लगाकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह ऑफ साइड के भी अच्छे खिलाड़ी हैं। यानी पुल और कवर ड्राइव पर उन्होंने ज़्यादा रन बटोरे। यहां रोचक यह है कि देवदत्त ने अपने फर्स्ट क्लास क्रिकेट, लिस्ट ए, टी 20 और अब आईपीएल की शुरुआत हाफ सेंचुरी से की। यह टी-20 की 13 पारियों में उनकी सातवीं हाफ सेंचुरी है। देवदत्त के खेल की दो बड़ी खूबियां हैं। एक, वह बाएं हाथ के बल्लेबाज़ और ओपनिंग बल्लेबाज़ हैं और उनके खेल का यही सिलसिला अगर आगे भी चलता रहा तो वह खासकर टी-20 फॉर्मेट में शिखर धवन को रिप्लेस करने का माद्दा रखते हैं।

वैसे भी टी 20 क्रिकेट की भारत की नैशनल चैम्पियनशिप यानी मुश्तकाक अली ट्रॉफी में उन्होने 176 के स्ट्राइक रेट से 580 रन बनाकर काफी सम्भावनाएं उजागर की हैं इसी तरह विजय हज़ारे ट्रॉफी टूर्नामेंट में भी वह देश के लीडिंग स्कोरर रहे। इनमें खासकर राणजी चैम्पियन सौराष्ट्र, मुम्बई और तमिलनाडु जैसे अच्छे अटैक वाली टीमों के खिलाफ उन्होंने बड़े स्कोर खड़े करके यह साबित कर दिया है कि उनके सामने जितना अच्छा अटैक होगा, वह उतना ही अच्छा प्रहार करने की कूवत रखते हैं। उनकी दूसरी बड़ी खूबी उनके शॉट्स की टाइमिंग है। जो खूबी कभी सौरभ गांगुली और गौतम गम्भीर जैसे बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों में देखने को मिलती थी, वही कुछ उनमें भी देखने को मिली। अब विराट की टीम में ही उन्हें मौका मिला है और विराट ने भी कई दिग्गजों को छोड़कर उसने ओपनिंग कराई है। यानी उनके लिए अभी से पॉज़ीटिव माहौल बनना शुरू हो गया है।

(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार एवं टीवी कमेंटेटर है)

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