नई दिल्ली. पाकिस्तान में एक दशक के बाद टेस्ट मैच का आयोजन होने जा रहा है. 11 दिसंबर को जब श्रीलंका की टीम रावलपिंडी में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच खेलेगी तो ये मेजबान टीम के लिए ऐतिहासिक पल होगा. पाकिस्तान में अंतिम बार टेस्ट मैच मार्च 2009 में हुआ था. ये टेस्ट मैच पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम पर खेला गया. ये वही टेस्ट मैच था जिसमें स्टेडियम आते वक्त श्रीलंका के खिलाड़ियों की बस पर आतंकियों ने गोलियां बरसाईं. ये तो श्रीलंका के खिलाड़ियों का सौभाग्य था कि इस हमले में किसी की जान नहीं गई. इस आतंकी हमले के बाद से पाकिस्तान की धरती पर क्रिकेट खेलने वाले देशों ने जाने से तौबा कर ली. आइए एक बार फिर इस लेख के माध्यम से हम आपकी यादें ताजा करते हैं.

साल 2009 में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने श्रीलंका की टीम को दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने के लिए आमंत्रित किया. सीरीज का पहला मैच 21 फरवरी 2009 से कराची में खेला गया जो ड्रॉ रहा. इसके बाद दूसरे टेस्ट मैच का आयोजन 1 से 5 मार्च के बीच लाहौर में किया गया. लाहौर में खेले गए टेस्ट मैच में पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने का निर्णय किया. श्रीलंका ने बैटिंग करते हुए पहली पारी में रनों का अंबार लगा दिया. श्रीलंका ने अपनी पहली पारी में 606 रन बनाए जिसमें कुमार सांगकारा 104, थिलन समरवीरा 214 और तिलकरत्ने दिलशान ने 145 रनों की पारी खेली.

टेस्ट मैच के दूसरे दिन पाकिस्तान की पारी शुरू हुई और दूसरे दिन का खेल समाप्त होने तक पाकिस्तान ने एक विकेट खोकर 110 रन बनाए. टेस्ट मैच के तीसरे जब बस में सवार श्रीलंका की टीम गद्दाफी स्टेडियम आ रही थी तो किसी क्या पता था कि आज क्या घटित होने वालाा है. स्टेडियम से थोड़ी दूर जिस बस में श्रीलंका के खिलाड़ी सवार थे आतंकियों ने मौका पाकर अंधाधुंध गोलियां बरसाना शुरू कर दिया. इस आतंकी हमले में श्रीलंका के कुछ खिलाड़ी चोटिल भी हुए लेकिन किसी की जान नहीं गई. इस हमले में तत्तकालीन कप्तान कुमार सांगकारा, अजंता मेंडिस, थिलन समरवीरा, थरंगा पर्णविताना और टीम के सहायक कोच पॉल फॉरब्रेस चोटिल हुए थे.

इस आतंकी हमले के बाद फिर टेस्ट मैच आगे नहीं खेला जा सका. श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड से तुरंत ये दौरा रद्द करने का फैसला किया. गद्दाफी स्टेडियम में ही हेलीकॉप्टर का इंतजाम किया गया और श्रीलंकाई खिलाड़ियों को एयरपोर्ट भेजा गया. श्रीलंका टीम पर इस हमले के बाद सभी क्रिकेट खेलने वाले देशों में पाकिस्तान में क्रिकेट खेलने से इनकार कर दिया. हालांकि इस दौरान पाकिस्तान ने कई क्रिकेट बोर्ड्स से अपने घरेलू मैदानों पर खेलने की अपील की.

आतंकी हमले के बाद साल 2015 में सबसे पहले जिम्बाब्वे की टीम ने पाकिस्तान की दौरा किया. इस दौरे पर जिम्बाब्वे ने तीन वनडे और दो टी20 मैचों की सीरीज खेली. उसके बाद साल 2017 में वर्ल्ड इलेवन की टीम पाकिस्तान दौरे पर गई. वहीं साल 2018 में श्रीलंका की टीम ने पाकिस्तान में एक वनडे मैच खेला. इसके बाद सितंबर/अक्टूबर 2019 में श्रीलंका की टीम ने पाकिस्तान में तीन वनडे और तीन टी20 इंटरनेशनल मैचों की सीरीज खेली.

अब साल 2009 के बाद वही श्रीलंका की टीम पाकिस्तान दो टेस्ट मैचों की सीरीजी खेलने जा रही थी जिसके कई खिलाड़ी लाहौर में आतंकी हमले के दौरान घायल हुए थे. ये 10 साल के बाद पहला मौका होगा जब पाकिस्तान की धरती पर पहला टेस्ट मैच खेला जाएगा. इस सीरीज का पहला मुकाबला रावलपिंडी और दूसरा मैच कराची में होगा. बीते 10 वर्षों में श्रीलंका ने यूएई के दुबई, अबूधाबी और शारजाह स्थित क्रिकेट स्टेडियम को अपना होमग्राउंड बनाया और इन्हीं मैदानों पर टेस्ट, वनडे और टी20 इंटरनेशनल मैच खेले. पाकिस्तान में टेस्ट क्रिकेट की वापसी उसके लिए किसी जश्न से कम नहीं है लेकिन देखना होगा कि पाकिस्तान दूसरे देशों की टीमों को कितनी सुरक्षा मुहैया कराता है.

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