India vs England T20 Match:  इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ 3-1 से जीतने के बाद अब सबकी निगाहें टी-20 सीरीज़ पर टिकी हैं। चूंकि मैं टीम इंडिया के लिए बतौर विकेटकीपर खेल चुका हूं, इसलिए मेरा पूरा ध्यान सबसे ज़्यादा विकेटकीपिंग पर रहता है। टीम के पास तीन विकल्प हैं – ऋषभ पंत, केएल राहुल और ईशान किशन।

इनमें ऋषभ पंत ने खुद को साबित किया है। न सिर्फ उन्होंने अपनी विकेटकीपिंग में सुधार किया है बल्कि बल्लेबाज़ी में भी शानदार प्रदर्शन करके सबका दिल जीत लिया है। उनकी बल्लेबाज़ी की सबसे बड़ी खूबी उनकी निरंतरता है। यानी आज आप उनकी बल्लेबाज़ी पर भरोसा कर सकते हैं। पहले ऑस्ट्रेलिया का दौरा और अब इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज़। इतना ही नहीं, पंत ने किसी भी तरह के दबाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया है। ऐसे में यह सवाल भी इन दिनों उठाया जा रहा है कि पंत को क्यों न टेस्ट क्रिकेट तक ही सीमित कर दिया जाए लेकिन अगर ऐसा होता तो उनका टी-20 टीम में चयन न किया गया होता। केएल राहुल ने भी व्हाइट बॉल क्रिकेट में अपनी विकेटकीपिंग से प्रभावित किया है। वह भी इस फॉर्मेट के काफी अच्छे बल्लेबाज़ हैं। टीम मैनेजमेंट के सामने सबसे बड़ा यह सवाल होगा कि इनमें किसे खिलाएं और किसी छोड़ें। मुझे तो ऐसा भी लगता है कि इन दोनों को भी प्लेइंग इलेवन में एक साथ रखा जा सकता है। राहुल को जब जब मौके मिले हैं, उन्होंने अपनी कीपिंग और बल्लेबाज़ी दोनों से प्रभावित किया है। लेकिन मुझे लगता है कि दोनों के एक साथ खेलने की स्थिति में पंत ही विकेटकीपिंग की ज़िम्मेदारी सम्भालेंगे।

वैसे टीम इंडिया में एक अन्य विकेटकीपर बल्लेबाज़ ईशान किशन को भी शामिल किया गया है, जो काफी प्रतिभाशाली हैं जिन्होंने पिछले आईपीएल में बढ़िया बल्लेबाज़ी करके सबको काफी प्रभावित किया है। दोनों अंडर 19 में एक साथ खेले हैं। ईशान के बारे में अभी से कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी क्योंकि जब उन्हें मौका मिलेगा तभी उनके प्रदर्शन पर कोई टिप्पणी करना उचित होगा। मेरे ख्याल से उन्हें अभी मौका मिलने के लिए इंतज़ार करना होगा।

टेस्ट क्रिकेट में रिद्धिमान साहा दुनिया के बेहतरीन विकेटकीपर होने के बावजूद बाहर बैठे हैं। तमाम आलोचक यह सवाल उठाते हैं कि जब उन्हें बाहर ही बैठना है तो क्यों न एक युवा विकेटकीपर को उनकी जगह टेस्ट टीम में शामिल किया जाए लेकिन मेरा यहां ये सवाल है कि अगर ईश्वर न करे, पंत को की इंजरी हो जाए तो आपके पास एक आला दर्जे के विकेटकीपर स्टैंडबाई के तौर पर मौजूद होंगे। अगर इस खिलाड़ी की फिटनेस 35 की उम्र के बावजूद अच्छी है तो उनकी उम्र को लेकर सवाल उठाना सही नहीं होगा। ज़हीर खान और आशीष नेहरा जैसे कितने ही खिलाड़ी 35 के बाद भी अच्छे रिज़ल्ट देते रहे हैं। बेहतर होगा कि हम इंडिया ए में विकेटकीपरों के प्रदर्शन पर बारीकी से नज़र बनाए रखें लेकिन फिलहाल साहा पर टेस्ट क्रिकेट में भरोसा रखें। बेशक उन्हें स्टैंडबाई के तौर पर बाहर ही क्यों न बैठना पड़े।

(लेखक टीम इंडिया में बतौर विकेटकीपर बल्लेबाज़ 6 टेस्ट और 12 वनडे खेल चुके हैं)

मुश्किल पिच पर ऋषभ पंत की पारी में धैर्य भी दिखा और आक्रामकता भी  

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