नई दिल्ली. T-20 विश्व कप ( India New Zealand match ) शुरू हो चुका है और इसको लेकर तमाम टीमें लगातार अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश कर रही है. बात करें भारतीय टीम की तो इस टीम के लिए विश्व कप की शुरुआत कुछ अच्छी नहीं रही बीते रविवार को हुए विश्व की सबसे बड़ी क्रिकेट जगत की राइवलरी, भारत बनाम पाकिस्तान के मुक़ाबले में भारतीय टीम को निराशा हाथ लगी. पाकिस्तानी टीम ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए यह मुक़ाबला 10 विकेट से एक तरफ़ा ही जीत लिया. ऐसे में अब भारत का मुक़ाबला न्यूज़ीलैंड से है. एक ऐसी टीम से जिसके ख़िलाफ़ T-20 विश्व कप में भारत का रिकॉर्ड कुछ बेहतर नहीं रहा है.

न्यूज़ीलैंड को हराने के लिए टीम इंडिया को बदलना होगा इतिहास

T-20 विश्व कप 2021 में पूरे एक हफ़्ते के ब्रेक के बाद कल अब भारतीय टीम का मुक़ाबला न्यूज़ीलैंड से है. दरअसल, कल होने वाला मैच विराट कोहली और भारतीय टीम के लिए करो या मरो जैसे मुक़ाबले की तरह रहने वाला है. टीम इंडिया की कोशिश रहेगी कि वे हर हाल में यह मुक़ाबला जीते और अपने सेमीफइनल में पहुँचने की उम्मीद को ज़िंदा रखे. लेकिन इसके लिए भारतीय टीम को निश्चित रूप से अपने प्लेइंग-11 में ज़रूरी बदलाव करने होंगे. वहीँ, न्यूज़ीलैंड के खिलाफ भारतीय टीम का T-20 विश्व कप इतिहास परेशान करने वाला है. एक ऐसा इतिहास जिसे भारतीय टीम के दिग्गज विकेट कीपर बल्लेबाज और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी नहीं बदल पाए.

हम बात कर रहे हैं उस इतिहास की जिसके चलते भारतीय टीम T-20 विश्व कप में न्यूज़ीलैंड को नहीं हरा पाई है. रिकार्ड्स की बात करें तो, भारत और न्यूज़ीलैंड का T-20 विश्व कप में केवल दो ही बार मुक़ाबला हुआ है और दोनों ही बार भारतीय टीम को इसमें हार का सामना करना पड़ा है. सबसे पहले साल 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप में धोनी की टीम को न्यूज़ीलैंड ने 10 रनों से हराया था. इसके बाद 2016 टी-20 वर्ल्ड कप में नागपुर के मैदान पर टीम इंडिया को 47 रनों से करारी हार का सामना करना पड़ा था.

ये कहता है दोनों टीमों का ओवरऑल रिकॉर्ड

दोनों टीमों के ओवरऑल रेकॉर्ड्स की बात करें तो हाल में हुए मैचों में भारतीय टीम को न्यूज़ीलैंड से दो बार हार का सामना करना पड़ा है. इसमें न्यूज़ीलैंड ने भारतीय टीम को 2019 वनडे विश्व कप के सेमीफाइनल मुक़ाबले में हराया था. इसके बाद मैनचेस्टर में खेले गए मैच में न्यूज़ीलैंड की टीम से भारतीय टीम 18 रनों से हार गई थी और फ़ाइनल का सफर भी तय नहीं कर पाई थी. इस तरह से देखा जाए तो भारतीय टीम निश्चित रूप से दवाब में होगी.

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