नई दिल्ली. क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 में 30 जून को भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए क्रिकेट वर्ल्ड कप मैच में भारत को 31 रनों से हार का सामना करना पड़ा. टीम इंडिया की इस हार के बाद क्रिकेट फैन्स काफी खफा हैं. भारत बनाम इंग्लैंड पर पाकिस्तान का भाग्य भी टिका था. अगर भारत इस मैच में इंग्लैंड को हरा देता तो पाकिस्तान के सेमीफाइनल में पहुंचने का रास्ता काफी हद तक आसान हो जाता. लेकिन भारत के हारते ही पाकिस्तान की भी उम्मीदें सेमीफाइनल में पहुंची की धूमिल हो गईं. एजबेस्टन में टीम इंडिया को मिली हार का दोषी महेंद्र सिंह धोनी को माना जा रहा है. भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट फैन्स का कहना है कि धोनी ने जानबूझकर अटैकिंग बल्लेबाजी नहीं की और भारत मैच हार गया. महेंद्र सिंह धोनी अंतिम ओवर्स में धुआंधार बल्लेबाजी करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने कई बार आखिरी ओवर्स में धमाकेदार बल्लेबाजी कर टीम इंडिया को मैच जिताए हैं. 30 जून को एक फिर क्रिकेट फैन्स को उम्मीद थी कि धोनी इंग्लैंड के खिलाफ भारत को मैच जिताएंगे. लेकिन धोनी के क्रीज पर रहने के बावजूद टीम इंडिया को इस मुकाबले में 31 रनों से हार का सामना करना पड़ा. भारत के मैच हारने के बाद महेंद्र सिंह धोनी को सोशल मीडिया पर जमकर निशाना बनाया जा रहा है. कुछ लोगों का कहना है कि महेंद्र सिंह धोनी ने मैच के दौरान अंतिम ओवर्स में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करने की कोशिश ही नहीं की, महेंद्र सिंह धोनी जानबूझकर मैच हारना चाहते थे. भारत के अलावा पाकिस्तान में भी क्रिकेट फैन्स ने धोनी सहित टीम इंडिया की खूब खिंचाई की.

महेंद्र सिंह धोनी को सोशल मीडिया पर गाली देने वाले लोगों को शायद बर्मिंघम के एजबेस्टन के इतिहास का पता नहीं है. एजबेस्टन में अब तक सातवां मौका था जब किसी टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 300 या उससे अधिक रन बनाए. एजबेस्टन में जब किसी टीम ने 300 या उससे ज्यादा रन बनाए हैं तो वह टीम मैच हारी नहीं है. इसलिए इस ग्राउंड पर जो टीम पहले खेलते हुए तीन सौ रनों का आंकड़ा पार कर लेती है वह अपने आप को उस मैच में अजेय मानती है. एजबेस्टन में अब तक सात बार टीमें 300 या उससे ज्यादा रन बनाए हैं और उन सभी टीमों को जीत मिली है. यानी कुल मानकर चेस करने वाली टीम को इस मैदान पर संघर्ष करना पड़ता है. जाहिर है भारत को जीतने के लिए 338 रनों का लक्ष्य मिला जिसे चेस करना टीम इंडिया के लिए आसान नहीं था. ये बात सही है अगर भारत इस लक्ष्य को इंग्लैंड के खिलाफ हासिल कर लेता तो टीम इंडिया का इतिहास एजबेस्टन में सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया जाता. क्योंकि भारत इस मैदान पर 300 या उससे ज्यादा रनों के टारगेट को हासिल करने वाली पहली टीम बनती.

आइए अब हम आपको बताते हैं कि इस मैदान पर 300 या उससे ज्यादा रन बनाने वाली टीमें के बीच खेले गए मैचों के रिकॉर्ड के बारे में बताते हैं. 9 जून 2015 को इंग्लैंड की टीम ने न्यूजीलैंड के विरुद्ध खेलते हुए 9 विकेट पर 408 रन बनाए जवाब में न्यूजीलैंड की टीम 198 रनों पर बिखर गई. 12 जुलाई 2010 को एक बार इंग्लैंड ने बांग्लादेश के खिलाफ एजबेस्टन में 7 विकेट पर 347 रन बनाए. इस मैच में बांग्लादेश की टीम 203 रन ही बना सकी. 26 मई 2009 इंग्लैंड ने वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलते हुए 7 विकेट पर 328 रन बनाए जवाब में वेस्टइंडीज की टीम 270 रनों तक पहुंच पाई. 22 अगस्त 1980 को इसी एजबेस्टन पर इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 320 रनों का स्कोर किया. इस मैच में कंगारू टीम 273 रनों पर सिमट गई. 4 जून 2017 को भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ इस ग्राउंड पर 319 रन किए और पाकिस्तान 164 रनों पर ढेर हो गया. 7 जून 1975 को न्यूजीलैंड ने एजबेस्टन में ईस्ट अफ्रीका के खिलाफ खेलते हुए 309 रन बनाए. इस मैच में ईस्ट अफ्रीका 8 विकेट पर 128 रन ही बना सका.

वहीं 30 जून 2019 को भारत और इंग्लैंड के बीच एजबेस्टन में खेलते हुए पहले टॉस जीतकर इंग्लैंड ने 337 रन बनाए. जिसके जवाब में टीम इंडिया ने निर्धारित 50 ओवर में 5 विकेट पर 306 रन बी बना सकी. भारत भले ही इस मैदान पर ये मुकाबला हार गया हो लेकिन हारने के बावजूद टीम इंडिया ने एजबेस्टन में इतिहास लिखा. एजबेस्टन के मैदान पर भारत दुनिया का ऐसा पहला देश है जिसने दूसरी पारी में बल्लेबाजी करते हुए 306 रन बनाए. एजबेस्टन में अब तक 61 वनडे मैच खेले जा चुके हैं लेकिन कभी ऐसा कभी नहीं हुआ किसी टीम ने दूसरी पारी में 300 रन बनाए हों.

महेंद्र सिंह धोनी को गालियां देने वाले या उनको अपशब्द कहने वाले क्रिकेट फैन्स से हम अंत में यही कहना चाहेंगे कि टॉस के दौरान विराट कोहली ने ऐसा क्यों कहा कि अगर वह टॉस जीतते तो कोहली खुद पहले बैटिंग करने का फैसला करते. क्योंकि विराट अच्छी तरह जानते थे कि इस पिच पर बल्लेबाजी करने वाली टीम फायदे में रहेगी. विराट को जानकारी थी कि बाद में स्पिनर्स को खेलना इस पिच पर मुश्किल हो जाएगा. यही कारण था कि पहली पारी में भारतीय स्पिनर्स की जमकर पिटाई हुई. वहीं इंग्लैंड के स्पिनर्स को खेलने में भारतीय बल्लेबाजों को खासी दिक्कत हुई.

जहां तक मेरा मानना है कि टीम इंडिया को क्रिकेट वर्ल्ड कप में एक झटका लगना जरूरी था. वह झटका भारत को सही वक्त पर लगा है. अगर टीम इंडिया समय रहते अपनी कमजोरियों को हल कर लेगी तो उसे 2019 क्रिकेट विश्व कप खिताब जीतने से कोई नहीं रोक सकता. क्योंकि भारतीय टीम इस विश्व कप में लगातार अति विश्वास का शिकार हो रही थी. यही कारण था कि भारतीय टीम को अफगानिस्तान जैसी दोएम दर्जे की टीम के आगे जीत के लिए संघर्ष करना पड़ा.

आपको याद होगा कि साल 2015 क्रिकेट वर्ल्ड कप में भारत ने बिना हारे सेमीफाइनल तक पहुंचा था तब ऐसा कहा गया कि टीम इंडिया वर्ल्ड कप का खिताब दूसरी बार भी जीतेगी. लेकिन ठीक उसी समय भारतीय टीम अतिविश्वास की शिकार हुई और सेमीफाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा. रही बात महेंद्र सिंह धोनी को तो वह अपने क्रिकेट करियर के उतार पर हैं लेकिन इस उम्र में भी उनकी बाजुओं में अभी बहुत दम बाकी है. आने वाले मैचों में एमएस धोनी अपनी बैटिंग से आलोचकों को करारा जवाब देते नजर आएंगे.

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