नई दिल्ली. भारतीय क्रिेकेट टीम के पूर्व कप्तान और स्टार बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर अपना 46वां जन्मदिन मना रहे हैं. सचिन का जन्म 24 अप्रैल 1974 को मुंबई में हुआ. वह भारतीय क्रिकेट टीम के लिए करीब 24 साल खेले. इस दौरान सचिन ने क्रिकेट मैदान पर जो सफलता हासिल की वह आज दुनिया का कोई भी क्रिकेट नहीं कर पाया. उन्होंने क्रिकेट करियर के दौरान दुनियाभर के तमाम फास्ट और स्पिनर बालर्स का सामना किया. वसीम अकरम, वकार युनिस, सकलैन मुश्ताक, शोएब अख्तर, कर्टली एम्ब्रोस, कोर्टनी वाल्श, एलन डोनाल्ड, शॉन पोलाक, चमिंडा वास, मुथैया मुरलीधरन, शेन वार्न, ग्लेन मैक्ग्रा जैसे दिग्गज गेंदबाजों की सचिन तेंदुलकर ने जमकर खबर ली. उनकी बल्लेबाजी का लोहा सर डॉन ब्रेडमैन ने तक माना. ब्रैडमैन अक्सर कहा करते थे कि जब मैं सचिन तेंदुलकर को खेलते देखता हूं तो ऐसा लगता कि मैं बल्लेबाजी कर रहा हूं.

इस सबके बावजूद सचिन तेंदुलकर ने टीम इंडिया के लिए एक संकटमोचक की भूमिका निभाई. उनकी भूमिका भारतीय टीम बेशक एक विशुद्ध बल्लेबाज की थी लेकिन गेंदबाजी में उन्होंने कभी अपने कप्तान को निराश नहीं किया. टीम इंडिया के कप्तान को जब कभी विकेट की दरकार हुई तो उन्होंने सचिन तेंदुलकर को गेंदबाजी के मोर्चे पर लगाया. सचिन हमेशा अपने कप्तान के भरोसे पर खरे उतरे.

क्रिकेट करियर के दौरान सचिन तेंदुलकर कि ये खासियत रही कि उन्होंने हमेशा अपने साथी क्रिकेटर का साथ दिया. 2 जनवरी 2008 को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सिडनी में खेले गए टेस्ट मैच के दौरान मंकीगेट विवाद हुआ. इस टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज एंड्रयू साइमंड्स और हरभजन सिंह के बीच तीखी नोंक झोंक हुई. दोनों ही खिलाड़ियों एक दूसरे पर जमकर स्लेजिंग की. मैच रेफरी ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए हरभजन सिंह को तीन मैच खेलने पर रोक लगाई. जिसका भारतीय खिलाड़ियों ने पुरजोर विरोध किया.

टीम इंडिया के तत्कालीन कप्तान अनिल कुंबले की मंशा थी कि दौरे को बीच में छोड़ दिया जाए. काफी समझाने बुझाने पर कुंबले बाकी बचे मैच खेलने पर राजी हुए. सिडनी टेस्ट जहां ऑस्ट्रेलिया ने जीता वहीं पर्थ में खेले गए टेस्ट मैच में भारत विजयी रहा. पर्थ टेस्ट में प्रतिबंध के चलते हरभजन सिंह नहीं खेल पाए थे इस दौरान वह गहरी मानसिक पीड़ा से गुजर रहे थे. ऑस्ट्रेलिया ने ये टेस्ट सीरीज 2-1 से जीती.

टेस्ट सीरीज के बाद ऑस्ट्रेलिया में सीबी सीरीज के तहत ट्रायुंगलर टूर्नामेंट खेला गया. हरभजन सिंह इस दौरान मानसिक पीड़ा से उबरे नहीं थे. सचिन तेंदुलकर ने हरभजन सिंह से कहा था कि वह मीडिया से दूरी बनाए रखें. इसके अलावा सचिन ने साथी खिलाड़ियों को हिदायत दी कि हरभजन सिंह को लेकर जो ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में लिखा जा रहा है उसके बारे में भज्जी को कोई नहीं बताएगा.

टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीबी सीरीज का सिडनी में खेला गया पहला फाइनल मैच जीत चुकी थी. भारतीय टीम को दूसरा फाइनल मैच खेलने ब्रिस्बेन जाना था. सिडनी एयरपोर्ट से भारतीय टीम ब्रिस्बेन के लिए उड़ान भर चुकी थी. फ्लाइट में उस दौरान कई भारतीय खिलाड़ी अखबार पढ़ रहे थे. इस दौरान एक भारतीय क्रिकेटर अखबार लेकर हरभजन सिंह के पास पहुंचा. उसने हरभजन से कहा देखो आज तुम्हारे बारे में ये लिखा गया है.

अखबार में हरभजन सिंह अपने बारे में लिखी गई टिप्पणी से काफी परेशान हुए. वह अखबार लेकर तुरंत सचिन तेंदुलकर के पास गए. हरभजन सिंह ने सचिन से कहा कि देखिए पाजी आज मेरे बारे में फिर लिखा गया. सचिन ने उस खिलाड़ी को जमकर खरी-खोटी सुनाई जो क्रिकेटर हरभजन के पास अखबार लेकर गया. हरभजन को मानसिक पीड़ा में देख सचिन ने फ्लाइट में उनकी सीट को बदलवाया और अपने बगल वाली सीट पर बैठा लिया. सचिन तेंदुलकर पूरे हवाई सफर के दौरान  हरभजन सिंह को मानसिक तौर पर मजबूत किया और उन्हें समझाया.

सचिन तेंदुलकर दुनिया के इकलौते ऐसे क्रिकेटर हैं जिन्होंने सबसे ज्यादा अंतराष्ट्रीय रन बनाए हैं. सबसे ज्यादा शतक, सबसे ज्यादा अर्धशतक, विश्व कप में सबसे ज्यादा रन, एक विश्व कप में सबसे अधिक रन, विश्व कप में सर्वाधिक शतक लगाने वाले बल्लेबाज, सबसे ज्यादा मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज का अवार्ड पाने वाले दुनिया के पहले क्रिकेटर हैं. इस सबके बावजूद वह साल 2011 क्रिकेट विश्व कप विजेता भारतीय टीम के सदस्य रहे.

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