साल 2005 की बात है. टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था. तभी अचानक एक ऐसा ईमेल सामने आया, जिसने पूरे भारतीय क्रिकेट में हंगामा खड़ा कर दिया. यह ईमेल उस समय के मुख्य कोच ग्रेग चैपल ने बीसीसीआई के अधिकारियों को भेजा था, लेकिन किसी तरह यह मीडिया तक पहुंच गया. इसमें उन्होंने कप्तान सौरव गांगुली पर कई गंभीर बातें लिखी थीं.
ग्रेग चैपल ने अपने ईमेल में कहा था कि सौरव गांगुली अब पहले जैसे कप्तान नहीं रहे. उन्होंने लिखा कि गांगुली मानसिक और शारीरिक रूप से टीम की अगुआई करने की स्थिति में नहीं हैं. साथ ही यह भी दावा किया कि खराब फॉर्म के बावजूद गांगुली टीम में अपनी जगह बनाए रखना चाहते थे. जैसे ही यह ईमेल बाहर आया, पूरे देश में इसी की चर्चा होने लगी.
गांगुली ने दिया करारा जवाब
सौरव गांगुली ने इन सभी आरोपों को गलत बताया. उनका कहना था कि उनके साथ सही व्यवहार नहीं किया गया. कई पूर्व क्रिकेटरों और लाखों फैंस ने गांगुली का खुलकर साथ दिया. वहीं कुछ लोगों का मानना था कि ग्रेग चैपल टीम में नए और फिट खिलाड़ियों को मौका देना चाहते थे. देखते ही देखते यह मामला भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े विवादों में बदल गया.
दोनों के रिश्ते कभी नहीं सुधरे
इस विवाद के बाद सौरव गांगुली से टीम इंडिया की कप्तानी छीन ली गई और कुछ समय के लिए उन्हें टीम से भी बाहर कर दिया गया. हालांकि, उन्होंने शानदार वापसी करते हुए फिर से अपनी जगह बना ली. दूसरी ओर, 2007 विश्व कप में भारत के खराब प्रदर्शन के बाद ग्रेग चैपल ने कोच पद छोड़ दिया. आज भी जब भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े विवादों की बात होती है, तो ग्रेग चैपल और सौरव गांगुली का यह मामला सबसे पहले याद किया जाता है.